मध्यप्रदेश में संक्रामक बीमारी तेजी से फैल रही जमेलियोइडोसिस (Melioidosis) को लेकर नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) ने अलर्ट जारी किया है। यह बीमारी पानी और मिट्टी में पाए जाने वाले बर्कहोल्डेरिया स्यूडोमेलाई नामक बैक्टीरिया से फैलती है। बरसात और उमस भरे मौसम में इसके संक्रमण की संभावना और बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बीमारी खासतौर पर मधुमेह, किडनी रोगियों और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों के लिए घातक साबित हो सकती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मेलिओडोसिस को एक उभरती हुई उपेक्षित बीमारी के रूप में सूचीबद्ध किया है। दक्षिण-पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया के बाद, भारतीय राज्य मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा इसके नए हॉटस्पॉट बनते दिख रहे हैं।
AIIMS भोपाल की रिपोर्ट
बाते मंगलवार 16 सितंबर को जारी एम्स भोपाल की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पिछले छह सालों में राज्य के 20 से अधिक जिलों से 130 से अधिक मामले सामने आए हैं।
यह बीमारी अब स्थानिक हो गई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मेलियोइडोसिस से पीड़ित हर 10 में से 4 मरीज़ मर रहे हैं। आश्चर्य की बात यह है कि इसके लक्षण अक्सर टीबी से मिलते जुलते हैं, जिसके कारण मरीज गलत इलाज करवा लेते हैं और संक्रमण पूरे शरीर में फैल जाता है।
ज्यादा खतरा किसे है ?
विशेषज्ञों के अनुसार धान के खेतों में काम करने वाले किसानों के साथ-साथ अत्यधिक शराब का सेवन करने वालों और मधुमेह के रोगियों को इस बीमारी से संक्रमित होने का सबसे अधिक खतरा है। भोपाल, इंदौर, सागर और रतलाम जिलों में ऐसे केस ज्यादा सामने आए हैं।
कैसे फैल रही ये बीमारी
मेलिओइडोसिस बर्कहोल्डरिया स्यूडोमैलेई नामक जीवाणु के कारण होता है, जो मिट्टी और दूषित पानी में पनपता है। इसका संक्रमण त्वचा के घावों, दूषित पानी और सांस के माध्यम से होता है। अगर तुरंत इलाज न किया जाए, तो इससे फोड़े, फेफड़ों में संक्रमण और सेप्सिस हो सकता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में इससे मृत्यु दर 40% तक है।