इलाज के नाम पर पेशेंट को दलाल ने मेडिकल कॉलेज से कराया डिस्चार्ज, तबीयत बिगड़ी तो छोड़ भागे, मौत

अरेरा हॉस्पिटल की लापरवाही से एक मरीज की जान चली गई। गंजबासौदा की मनोबाई परिहार विदिशा मेडिकल कॉलेज में भर्ती थी जिनका हार्ट का ऑपरेशन होना था। अरेरा हॉस्पिटल के दलाल मेडिकल कॉलेज पहुंचे और मरीज के परिजनों को गुमराह कर पेशेंट को अपने अस्पताल में ले आए।

यहां मनोबाई की एंजियोप्लास्टी की गई, तबियत बिगड़ते देख अरेरा हॉस्पिटल का स्टाफ मरीज को भोपाल रेफर करने का बोलकर उनको मेडिकल कॉलेज में छोड़ गए जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। डाक्टरों उसे मृत देखकर भर्ती करने से मना कर दिया इस बात को लेकर विवाद गहरा गया और परिजनों ने हंगामा खड़ा कर दिया। मामला बढ़ता देख पुलिस और स्टाफ ने समझाईश देकर उसे शांत कराया। परिजनों ने अरेरा हॉस्पिटल पर इलाज के नाम पर 2 लाख रुपए नगद लेने का आरोप लगाया है।

इसके अलावा आयुष्मान कार्ड से भी अस्पताल ने पैसे निकाले हैं। मृतिका की परिजन फुलबाई और पप्ती का कहना हैं कि अपनी मां की मौत से दुखी परिजनों का मेडिकल कॉलेज में रो-रो कर बुरा हाल था मृतक मनोबाई के बेटे का कहना है कि उनकी मां पहले मेडिकल कॉलेज में भर्ती थी तो तबीयत ठीक थी लेकिन अरेरा हॉस्पिटल के दलालों ने यह कहकर छुट्टी करवा दी कि मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं है और उनकी मां की तबीयत बिगड़ सकती है। इसके बाद घबराए परिजनों ने उनको अरेरा हॉस्पिटल में एडमिट किया था, जहां तबीयत बिगड़ते देख अस्पताल के स्टाफ ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया और मरीज की मौत हो गई। पूरे मामले को लेकर अरेरा हॉस्पिटल के मैनेजर पहलवान सिंह का बयान सामने आया है जिसमें उनका कहना है कि मरीज को परिजनों की सहमति से भोपाल रेफर किया गया था इसके बाद यह पूरी घटना हुई है।

भेजते हैं सरकारी अस्पताल पहुंचते हैं प्रायवेट नर्सिग होम्स

शहर में इन दिनों ग्रामीण तथा शहीर क्षैेत्र के कई मीरजों को अच्छा इलाज दिलाने के नाम पर प्रायवेट नर्सिग होम्स भेजा जाता हैं। जिससे कई मरीजो के परिजनों को समस्या का सामना करना पड़ता हैं ताजा उदाहरण गंजबासौदा की मनोबाई परिहार हैं जिसे पहले अटल विहारी मेडीकल कालेज में भर्ती कराया गया इसके बाद उसे कहो ले जाकर भर्ती कराया किसी को भी पता नही हैं।

ऐसा ही एक मामला दो दिन पूर्व आया हैं: 28 सितंबर को रियांश अहिरवार पिता रतन को आठ सितंबर को भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के चलते परिजनों ने आरोप लगाएं थे और उसे डीएच भेजा गया था जहां से डाक्टरों ने परीक्षण कर उसे भोपाल बच्चे को ले जाने की सलाह दी थी। और वह बाद में वापिस रात में मेडीकल कालेज आ गया था जहां से उसे भोपाल रिफर कर दिया था लेकिन सूत्रों से जो खबर सामने आयी हैं उसमें एम्बूंलेंस से बच्चा हमीदिया नही पहुंचा और वह किसी प्रायवेट नर्सिग होम्स में इलाज कराने चला गया। जहां 28 सितंबर से लेकर 1 अक्टूबर तक प्रायवेट अस्पताल में भर्ती रहा। इसके बाद दो अक्टूबर को उसे एम्स में भर्ती कराया गया हैं। इस बात की पुष्टिी शुक्रबार को कालेज प्रबंधन द्वारा की गई हैं। शुक्रवार को मेंउीकल कालेज के अधीक्षक अभिनाश लाकबे और शिशु रोग विभाग की एचओडी नीति अग्रबाल सहित डाक्टरों के स्टाप द्वारा बच्चे की बीमारी पर प्रकाश डाला। और बताया कि उसे भोपाल रिफर किया गयां।