मेडिकल कॉन्सिल ऑफ इंडिया के नियमों पर भारी स्वास्थ्य विभाग

 प्रदेश टुडे संवाददाता. विदिशा: मेडीकल कॉन्सिल ऑफ  इन्डिया एवं प्रदेश शासन के नियम-कायदों को पर जिला स्वास्थ्य विभाग कितनी गभीरता से लेता है इसका उदाहरण जिले में कई सरकारी डाक्टर्स मेडीकल स्टोर्स संचालकों से सेटिंग कर निजी क्लिनिक संचालित हो रहे हैं,जहां इलाज कराने पहुंचने वाले मरीजों के लिए डाक्टर्स द्वारा जो दवाईयां लिखी जाती हें वह सिर्फ उसी मेडीकल स्टोर पर मिलेगी जहां पर उनके निजी क्लिनिक संचालित हैं ऐसी स्थिति में इलाज कराने वाले मरीज को  दवाईयां उसी मेडीकल स्टोर व जांच उसी  लैब से कराने पर विवश होना पड़ता जो डाक्टर द्वारा बताई जाती हैं। नियम विरूद्ध यह व्यवस्था जिले में काफी लंबे से चल रही है। 

स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग जांच के नाम पर समय-समय पर सबकुछ ओके करके मेडीकल कॉन्सिलऑफ इन्डिया व प्रदेश सरकार के नियमों कायदों की अनदेखी कर रहा है। विभाग  नियमों का पालन कराए  इसके लिए कांग्रेस जिला प्रकोष्ठ सूचना का अधिकार  के अध्यक्ष शोभित अग्रवाल ने विभिन्न बिंदुओं को लेकर एक शिकायती आवेदन स्वास्थ्य विभाग को दिया है। श्री अग्रवाल ने जिस तरह से शिकायती आवेदन में लिखा है अगर उन सभी बिंदुओं पर ईमानदारी से जांच हो जाए तो जिले में चौकानी  वाली स्थिति सामने आ सकती है। 

बिना रजिस्ट्रेशन के क्लिनिक हो रहे हैं संचालित 

कांग्रेस जिला प्रकोष्ठ सूचना का अधिकर के अध्यक्ष शोभित अग्रवाल ने  मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जिला के नाम जो आवेदन दिया है उसमें आरोप लगाया गया हैं कि जिले में  पदस्थ सरकारी डाक्टर्स द्वारा नियम-विरूद्ध मेडिकल दुकानों व अपने आवास से अन्य जगह पर क्लिनिक बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित कर रहे हैं। जिले में प्रायवेट हॉस्पिटनल, क्लिनिक, मैथालॉजी लैब, सोनोंगाफी सेंटर एवं एक्स-रे आदि के लभगभ 170 से 175 संस्थान जिला स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय मे  पंजीकृत है। जिसमे डॉक्टर आर्थो ग्यानाक्लोजिस्ट, फिजिशियन, शिशु रोग, जनरल मेडिसिन, आई स्पेशलिस्ट,डेंटिस्ट आदि सम्मिलित हैं। आरोप हैं कि सम्पूर्ण जिले में सरकारी डाक्टरों द्वारा मेडिकल कॉन्सिल ऑफ  इन्डिया,भारत सरकार एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा निर्धारित नियमों कि अनदेखी कर मेडिकल दुकानदारों से सांठगांठ कर उनकी दुकानों के अंदर एवं समीप में अपना क्लिनिक संचालित कर रहे हैं। जिससे उनके द्वारा लिखी हुई दवाइयां अन्य मेडीकल दुकानों पर मिलना बहुत मुश्किल होता है  नियमों में स्पष्ट उल्लेख है कि कोई भी सरकारी डॉक्टर अपने आवास के अतिरिक्त कहीं अन्य जगह क्लिनिक संचालित नहीं कर सकता लेकिन संपूर्ण जिले मे  सरकारी डॉक्टरों का यहा नियमविरूद्ध कार्य स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे चल रहा है। जिससे जिले के आम नागरिकों को अपने व अपने परिजनों के इलाज में भारी भरकम रकम चुकाना पड़ती है। 

सरकारी डाक्टर खुद का क्लिनिक नहीं खोल सकता

 शिकायती आवेदन मे  कहा गया है कि मध्यप्रदेश शासन के नियमों के अनुसार एक सरकारी डॉक्टर अपना खुद का क्लिनिक नहीं खोल सकता लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में जैसे कि 50 हजार से अधिक आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में सहायक शल्य चिकित्सक को वार्षिक  शुल्क जमा करने के बाद निजी प्रैक्टिस की छूट मिल सकती है। लेकिन उन्हें केवल घर पर ही सीमित बुनियादी उपकरण जैसे स्टेथोस्कोप, बीपी उपकरण रख कर मरीजों का परामर्श करने की अनुमति है।  

 30 दिवस में जांच कराकर करो कार्यवाही 

 शिकायती आवेदन में उल्लेख किया गया है कि सरकारी डॉक्टर अपने या श्तिेदारों के नाम पर एक्स-रे मशीन, यूएसजी मशीन इको-कार्डियोग्राफी मशीन जैसे बडे उपकरणों को पंजीकृत या स्थापित नहीं कर सकते हैं। संपूर्ण जिले में सरकारी डॉक्टर प्रायवेट हॉस्पिटल में भी जाते हैं। सरकार पद पर रहते हुए डॉक्टरों का यह कृत नियम-विरूद्ध है। श्री अग्रवाल ने नियम-विरूद्ध जो भी सरकारी डॉक्टर अपना क्लिनिक संचालित कर रहे हैं उनकी जांच शिकायती आवेदन पत्र प्राप्ति  के 30 दिवस में कर दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्यवाही करने की गुहार लगाई है।