रिलायंस समूह के चेयरमैन अनिल अंबानी के सहयोगी और रिलायंस पावर लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारी अशोक कुमार पाल को 17,000 करोड़ रुपए के कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के सिलसिले में गिरμतार किया गया है। बीते दिनों में ईडी ने अनिल अंबानी को पूछताछ के लिए बुलाया था। एजेंसी ने 12 से 13 बैंकों से डिटेल मांगी है कि जब रिलायंस हाउसिंग फाइनेंस, रिलायंस कम्युनिकेशंस और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस को लोन दिया गया था तब किस तरह की ड्यू डिलिजेंस यानी जांच की गई थी। यह गिरफ्तारी 10 अक्टूबर को हुई। पाल पर अनिल अंबानी की रिलायंस ग्रुप से जुड़े 68.2 करोड़ के फर्जी बैंक गारंटी और इनवॉइसिंग का आरोप है। ईडी के मुताबिक, पाल ने रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस कॉमर्शियल फाइनेंस से 12,524 करोड़ के लोन बांटे, जो ज्यादातर अनिल अंबानी ग्रुप की कंपनियों को दिए गए। पाल पर फर्जी दस्तावेजों को मंजूरी देने और पैसे गलत तरीके से ट्रांसफर करने का आरोप है।
CBI ने सितंबर में फाइल की थी चार्जशीट
यस बैंक के साथ फ्रॉड मामले में सीबीआई ने 18 सितंबर को अनिल अंबानी और अन्य लोगों के खिलाफ दो अलग-अलग चार्जशीट फाइल की थी। इन पर आरोप है कि अंबानी की ग्रुप कंपनियों और यस बैंक के पूर्व उएड राणा कपूर के परिवार की कंपनियों के बीच कथित तौर पर फर्जी लेन-देन हुए, जिससे बैंक को 2,796 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। सीबीआई ने कहा था कि राणा कपूर ने यस बैंक के फंड्स को अंबानी की कमजोर कंपनियों- RCFL और RHFL में डाला। बदले में, अंबानी की कंपनियों ने कपूर फैमिली की कंपनियों को कम ब्याज पर लोन और इन्वेस्टमेंट दिए। ये लेन-देन का सौदा था।