भाजपा का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष अब बिहार विधानसभा चुनावों के समापन के बाद चुना जाएगा। इस बात का खुलासा रक्षा मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह ने किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा में कोई आंतरिक मतभेद नहीं है और सभी नेता संगठन के फैसलों से पूरी तरह एकमत हैं। यह जानकारी राजनाथ सिंह ने मीडिया को दिए एक साक्षात्कार में साझा की।
राजनाथ सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया पार्टी की स्थापित परंपराओं और संगठनात्मक नियमों के अनुरूप ही होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा एक अनुशासित दल है, जहां निर्णय सामूहिक चर्चा से लिए जाते हैं, न कि किसी एक व्यक्ति की इच्छा से। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की भूमिका पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि संघ भाजपा के राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करता। संघ का योगदान देशभक्ति, अनुशासन और सेवा भावना को बढ़ावा देने तक सीमित है। भाजपा और संघ का रिश्ता वैचारिक स्तर पर है, न कि राजनीतिक दखलंदाजी का।
बिहार चुनाव के संदर्भ में राजनाथ सिंह ने पूर्ण विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) फिर से सत्ता हासिल करेगा। उन्होंने दावा किया कि जनता का झुकाव स्पष्ट रूप से एनडीए की ओर है और गठबंधन को दो-तिहाई से अधिक बहुमत मिलने की संभावना है। उन्होंने यह भी दोहराया कि चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ा जा रहा है और परिणामों के बाद भी वे ही मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे।
इस बीच, चुनावी रणनीतिकार से राजनीतिक नेता बने प्रशांत किशोर और उनकी जन सुराज पार्टी पर निशाना साधते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रशांत किशोर कोई निर्णायक कारक नहीं हैं। जनता भलीभांति समझती है कि कौन वोट काटने के इरादे से मैदान में है और कौन सरकार बनाने की मंशा रखता है। उन्होंने भविष्यवाणी की कि जन सुराज पार्टी शायद एक भी सीट हासिल न कर पाए।
राजनाथ सिंह के इस बयान से यह संकेत भी मिलता है कि भाजपा संगठन में बदलाव की योजना पर काम कर रही है, लेकिन इसे बिहार चुनावों के बाद तक स्थगित रखने का निर्णय लिया गया है, ताकि चुनावी अभियान पर पूरा फोकस बना रहे।