प्रशांत किशोर ने पूरा किया 24 घंटे का मौन उपवास, आत्ममंथन के बाद अब नई रणनीति का इंतजार

बिहार विधानसभा चुनाव में एक भी सीट न जीत पाने वाली जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने अपना 24 घंटे का मौन उपवास शुक्रवार को समाप्त कर लिया। पश्चिम चंपारण जिले स्थित भितिहरवा गांधी आश्रम में गुरुवार सुबह 11 बजे शुरू हुआ यह मौन व्रत ठीक अगले दिन सुबह 11 बजे खत्म हुआ। पार्टी नेताओं के अनुसार यह उपवास किसी विरोध प्रदर्शन के रूप में नहीं, बल्कि चुनावी हार के बाद गहन आत्मचिंतन और जनादेश को गहराई से समझने की प्रक्रिया का हिस्सा था।

बेतिया में धरना स्थल पर प्रशांत किशोर पूरी रात मौजूद रहे और थकावट के चलते बैठे-बैठे ही नींद ले ली। सुबह भी उन्हें इसी स्थिति में झपकी लेते देखा गया। जन सुराज के पदाधिकारियों ने बताया कि लगातार संगठनात्मक समीक्षा के बीच प्रशांत किशोर ने शांतिपूर्ण ढंग से मौन उपवास रखने का निर्णय लिया था।

243 सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद जन सुराज को एक भी सीट नहीं मिली। पार्टी के लगभग 98 प्रतिशत उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। केवल मढ़ौरा विधानसभा क्षेत्र में दूसरे स्थान पर रहने का संतोषजनक प्रदर्शन हुआ, लेकिन वहां भी जीत नहीं मिली। पूरे राज्य में पार्टी का वोट प्रतिशत महज दो फीसदी के आसपास रहा। खुद प्रशांत किशोर के गृह क्षेत्र करगहर (रोहतास) में भी पार्टी को सिर्फ 7.42 प्रतिशत मत ही हासिल हो सके।

चुनाव परिणाम आने के बाद प्रशांत किशोर ने हार की पूरी जिम्मेदारी स्वीकार की थी। इसी क्रम में एक पत्रकार द्वारा उनके पुराने बयान की याद दिलाए जाने पर वे आक्रोशित हो गए थे। पत्रकार ने कहा था कि यदि जदयू को 25 से अधिक सीटें मिलीं तो वे राजनीति छोड़ देंगे, इस पर पीके ने जवाब दिया कि वे किसी पद पर हैं ही नहीं कि उसे छोड़ें।

इधर, जन सुराज के नेता और भोजपुरी फिल्म अभिनेता रितेश पांडे ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार में बड़े पैमाने पर वोट खरीदे गए और बिहार की अस्मिता के साथ खिलवाड़ किया गया। उन्होंने दावा किया कि प्रशांत किशोर ने पूरी ईमानदारी से राजनीति करने की कोशिश की, लेकिन लोकतंत्र को कलंकित करने वाले सबसे निम्न स्तर के हथकंडे इस्तेमाल किए गए।