ग्लोबल ट्रेड में चुनौतियों और US टैरिफ्स के दबाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने जुलाई-सितंबर तिमाही (Q2 FY26) में 8.2% की मजबूत दर से वृद्धि दर्ज की है। नेशनल स्टैटिस्टिकल ऑफिस (NSO) के इन आँकड़ों के अनुसार, यह पिछले छह तिमाहियों में दर्ज की गई सबसे अधिक विकास दर है, जो पिछली समान तिमाही (5.6%) और अप्रैल-जून तिमाही (7.8%) से काफी बेहतर है।
ग्रोथ के मुख्य इंजन और RBI का अनुमान
NSO के आंकड़ों से साफ है कि मुख्य रूप से ग्रामीण डिमांड, सरकारी खर्च (Government Spending) और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की तेज रफ्तार ने अर्थव्यवस्था को यह बूस्ट दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि GST रेट कट का पूरा असर आना अभी बाकी है, लेकिन ये परिणाम पहले ही उम्मीद से अधिक हैं। रिजर्व बैंक (RBI) ने भी अर्थव्यवस्था के अनुकूल माहौल को देखते हुए, FY26 के लिए इकोनॉमी ग्रोथ का अनुमान 6.5% से बढ़ाकर 6.8% कर दिया है, जो निकट भविष्य में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत देता है।
GDP की परिभाषा और गणना
जीडीपी (GDP) यानी सकल घरेलू उत्पाद का उपयोग किसी देश की इकोनॉमी की हेल्थ को ट्रैक करने के लिए होता है। यह देश की सीमा के भीतर एक तय समय में उत्पादित सभी गुड्स (माल) और सर्विसेस (सेवाओं) की कुल वैल्यू को दर्शाती है, जिसमें देश में रहकर विदेशी कंपनियों द्वारा किए गए उत्पादन को भी शामिल किया जाता है। जीडीपी दो तरह की होती है—रियल जीडीपी (जिसका कैलकुलेशन बेस ईयर 2011-12 पर होता है) और नॉमिनल जीडीपी (जो करंट प्राइस पर कैलकुलेटेड होती है)।
जीडीपी की गणना के लिए $GDP = C + G + I + NX$ फॉर्मूले का इस्तेमाल किया जाता है, जहाँ C प्राइवेट कंजम्प्शन, G गवर्नमेंट स्पेंडिंग, I इन्वेस्टमेंट और NX नेट एक्सपोर्ट है। जीडीपी की घट-बढ़ के लिए चार प्रमुख कारक जिम्मेदार होते हैं: आप और हम (प्राइवेट कंजम्प्शन), प्राइवेट सेक्टर की बिजनेस ग्रोथ (जो जीडीपी में लगभग 32% का योगदान देती है), सरकारी खर्च (जो 11% योगदान देता है), और नेट डिमांड (भारत में इम्पोर्ट अधिक होने के कारण जिसका प्रभाव अक्सर निगेटिव रहता है)।