मस्कुलर डिस्ट्रॉफी मरीजों को राहत, ‘आयुष्मान बाल संबल योजना’ की 18 साल की उम्र सीमा हटी

राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने मस्कुलर डिस्ट्रॉफी जैसी दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित मरीजों के उपचार को लेकर एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित किया है। जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस अनुरूप सिंघी की खंडपीठ ने मुख्यमंत्री आयुष्मान बाल संबल योजना-2024 की 18 वर्ष की आयु सीमा को फिलहाल हटा दिया है।

सभी आयु वर्ग को मिलेगा उपचार लाभ

कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगला आदेश आने तक योजना की क्लॉज 5 की कंडीशन-1 सभी आयु वर्ग के मरीजों पर लागू होगी। इसका अर्थ है कि अब 18 वर्ष से अधिक आयु के वयस्क मरीज भी सूचीबद्ध दुर्लभ बीमारियों (Listed Rare Diseases) के उपचार और आर्थिक सहायता के पात्र होंगे, जो अभी तक केवल नाबालिगों को मिल रही थी।

याचिकाकर्ता ने उठाए थे पांच प्रमुख मुद्दे

यह अंतरिम आदेश स्वावलंबन फाउंडेशन की याचिका पर आया। याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट डॉ. सचिन आचार्य ने कोर्ट के समक्ष मस्कुलर डिस्ट्रॉफी मरीजों के उपचार में आ रही पाँच प्रमुख समस्याओं को रखा:

  1. जीन टेस्टिंग की कमी: AIIMS जोधपुर में जीन टेस्टिंग न होना, जिससे मरीजों को महंगे निजी लैब्स पर निर्भर रहना पड़ता है।
  2. योजना से बाहर: 18 वर्ष से ऊपर के वयस्क मरीजों को योजना से बाहर रखना।
  3. इलाज का अभाव: पूरे राजस्थान में केवल AIIMS जोधपुर पर निर्भरता और जेके लोन हॉस्पिटल में केवल प्रशासनिक काम होना।
  4. कवर में कमी: GNE मायोपैथी जैसी गंभीर बीमारियाँ योजना की सूचीबद्ध बीमारियों से बाहर होना।
  5. वित्तीय सहयोग: अन्य राज्यों के मुकाबले वित्तीय व पुनर्वास सहयोग का अभाव।

कोर्ट ने कहा- “बेहद चिंतित और व्याकुल”

राज्य सरकार ने अपनी दलील में माना कि मस्कुलर डिस्ट्रॉफी एक गंभीर बीमारी है, लेकिन विशेषज्ञों की राय के आधार पर 18 साल के बाद सर्वाइवल की कम संभावना के कारण योजना को 18 वर्ष तक सीमित रखा गया था।

रिकॉर्ड और दलीलों को सुनने के बाद बेंच ने स्पष्ट कहा कि अदालत इस मुद्दे को लेकर “बेहद चिंतित और व्याकुल” हैं। इसके बाद कोर्ट ने मेरिट पर विस्तृत टिप्पणी टालते हुए, वयस्क मरीजों को तत्काल राहत देने के लिए योजना की उम्र सीमा हटाने का अंतरिम निर्देश दिया। मामले की विस्तृत सुनवाई अब 16 दिसंबर को होगी।