संसद के शीतकालीन सत्र में लोकसभा में एक नया विधेयक पेश किया गया, जो महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह लेगा। इस विधेयक का नाम ‘विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल, 2025’ है, जिसे संक्षिप्त रूप में वीबी-जी राम जी कहा जा रहा है। यह बिल कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सदन में प्रस्तुत किया, जिस पर तीखी बहस छिड़ गई।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस विधेयक का कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि योजनाओं के नाम बार-बार बदलने की यह प्रवृत्ति समझ से बाहर है, क्योंकि इससे सरकारी खजाने पर अनावश्यक बोझ पड़ता है और प्रशासनिक बदलावों में काफी धन व्यय होता है। प्रियंका ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की मंशा योजना को कमजोर करने की है क्योंकि फंडिंग में केंद्र का हिस्सा घटाया जा रहा है और ग्राम सभाओं की भूमिका सीमित की जा रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रपिता हैं और उनके नाम को योजना से हटाना अनुचित है। प्रियंका ने भावुक होते हुए कहा कि गांधीजी उनके परिवार के सदस्य नहीं थे, लेकिन परिवार जैसे ही थे। उनका सुझाव था कि बिल पर पहले विस्तृत चर्चा हो और सुझावों को शामिल कर संशोधित विधेयक लाया जाए।
इसी तरह, तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत राय ने भी नाम बदलने पर आपत्ति दर्ज की। उन्होंने कहा कि भगवान राम पूजनीय हैं, लेकिन वर्तमान संदर्भ में महात्मा गांधी अधिक प्रासंगिक हैं। नए प्रावधानों से राज्यों पर वित्तीय भार बढ़ेगा, क्योंकि फंडिंग का बड़ा हिस्सा अब राज्य सरकारों को वहन करना पड़ेगा, जो पहले की तुलना में काफी अधिक है। टीएमसी ने इस आधार पर विधेयक का विरोध किया।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी इस कदम को गांधीजी का अपमान बताया और कहा कि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को ऐसे व्यक्ति के रूप में याद किया जाएगा जिन्होंने राष्ट्रपिता का नाम हटा दिया। विपक्षी दलों का मुख्य तर्क है कि विधेयक में रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 करने का प्रस्ताव तो है, लेकिन मजदूरी दरों में वृद्धि या समय पर भुगतान की गारंटी पर चुप्पी है, साथ ही योजना को मांग-आधारित से बजट-निर्धारित बनाने से ग्रामीण गरीबों के अधिकार कमजोर होंगे।
सदन में बिल पेश होते ही हंगामा हुआ और विपक्ष ने इसे स्थायी समिति को भेजने या वापस लेने की मांग की। सरकार का दावा है कि यह विधेयक विकसित भारत 2047 की दृष्टि से ग्रामीण विकास को मजबूत करेगा और अधिक रोजगार प्रदान करेगा।