उज्जैन में सावन-भादौ के दौरान महाकाल की 6 भव्य सवारियां निकलेंगी

शिव भक्तों के लिए खास सावन मास आज से शुरू हो गया है। उज्जैन की पावन धरती पर बाबा महाकालेश्वर की नगरी इन दिनों भक्तों की भारी भीड़ को समेटने की तैयारी में जुटी हुई है। महाकाल मंदिर प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, श्रावण और भाद्रपद मास में भगवान महाकाल की कुल छह राजसी सवारियां निकाली जाएंगी।

इनमें श्रावण के चार सोमवार और भाद्रपद के दो सोमवार शामिल हैं। पहली सवारी 3 अगस्त को निकलेगी, जबकि अंतिम और सबसे भव्य शाही सवारी 7 सितंबर को होगी। हर सवारी शाम चार बजे मंदिर के सभा मंडप में पूजा-अर्चना के बाद रवाना होगी।

सवारियों की तिथियां और थीम

  • 3 अगस्त: वैदिक परंपरा पर आधारित
  • 10 अगस्त: लोक कलाओं और नृत्यों की छटा
  • 17 अगस्त: विभिन्न बैंडों की प्रस्तुति
  • 24 अगस्त: पर्यावरण संरक्षण संदेश
  • 31 अगस्त: 84 महादेव झांकियां
  • 7 सितंबर: सिंहस्थ-2028 की झलक के साथ ड्रोन से फूलों की वर्षा

भक्तों की भीड़ और खास व्यवस्थाएं

प्रशासन का अनुमान है कि सावन के दौरान प्रतिदिन करीब चार लाख श्रद्धालु उज्जैन पहुंच सकते हैं। मंदिर के पट रोज सुबह तीन बजे खुलेंगे, जबकि सोमवार को ढाई बजे। भस्म आरती के बाद दर्शन रात दस बजे तक चलेंगे। कांवड़ यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को मंगलवार से शुक्रवार तक महाकाल को जल चढ़ाने की सुविधा दी जाएगी।

सुरक्षा-व्यवस्था में कड़ी तैयारी

जिला प्रशासन ने सवारी मार्ग, पार्किंग, स्वच्छता, चिकित्सा और यातायात को लेकर पूरी तैयारी कर ली है। सवारी वाले सोमवार को स्थानीय स्कूल बंद रहेंगे और सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल तैनात रहेगा। मुख्य मार्ग पर बैरिकेडिंग और निगरानी के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

सवारी महाकाल मंदिर से शुरू होकर गुदरी चौराहा, कहारवाड़ी, रामघाट होते हुए वापस मंदिर लौटेगी। रामघाट पर शिप्रा नदी में बाबा का अभिषेक किया जाएगा।