छत्तीसगढ़ में नक्सलियों पर सुरक्षाबलों का प्रचंड प्रहार: सुकमा और बीजापुर मुठभेड़ में 14 माओवादी ढेर

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग में सुरक्षाबलों ने शनिवार को एक बड़े ऑपरेशन को अंजाम देते हुए कुल 14 नक्सलियों को मार गिराया है। यह कार्रवाई सुकमा और बीजापुर जिलों में दो अलग-अलग मुठभेड़ों के दौरान हुई। सुकमा के किस्टाराम इलाके में जवानों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए 12 नक्सलियों को ढेर किया, वहीं बीजापुर में चली लंबी मुठभेड़ में 2 नक्सली मारे गए। बीजापुर के एसपी जितेंद्र यादव ने पुष्टि की है कि मुठभेड़ स्थल से दो नक्सलियों के शव और हथियार बरामद कर लिए गए हैं। शनिवार तड़के करीब 5 बजे शुरू हुई यह जंग रुक-रुक कर अब भी जारी है और सुरक्षा कारणों से ऑपरेशन के सटीक स्थान को अभी गुप्त रखा गया है।

नक्सलियों के खिलाफ यह सफलता उस समय आई है जब हाल ही में 25 दिसंबर को पड़ोसी राज्य ओडिशा के कंधमाल में सुरक्षाबलों ने सेंट्रल कमेटी मेंबर गणेश उईके सहित 6 नक्सलियों को मार गिराया था। गणेश उईके पर 1 करोड़ रुपये से अधिक का इनाम था। छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सीमाओं पर लगातार बढ़ रहे इन ऑपरेशंस ने नक्सलियों की कमर तोड़ दी है। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, अब बस्तर के जंगलों में केवल 200 से 300 सशस्त्र कैडर ही बचे हैं, जो टुकड़ों में यहां-वहां छिपे हुए हैं। महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ (MMC) जोन के लगभग खात्मे के बाद अब नक्सलियों का अस्तित्व केवल दक्षिण बस्तर के कुछ हिस्सों तक ही सिमट गया है।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले 90 दिन बस्तर को पूरी तरह नक्सल मुक्त करने के लिए बेहद निर्णायक साबित होंगे। वर्तमान में दक्षिण बस्तर के जंगलों में कुख्यात नक्सली नेता पापाराव और उसके कुछ साथियों के छिपे होने की जानकारी है। सुरक्षाबलों का मुख्य लक्ष्य पापाराव, मिशिर बेसरा और देवजी जैसे शीर्ष नेताओं को ट्रैक करना है। अधिकारियों का कहना है कि यदि अगले तीन महीनों में ये 5-6 बड़े लीडर्स मारे जाते हैं या आत्मसमर्पण कर देते हैं, तो बस्तर की फ्रंट लाइन लीडरशिप पूरी तरह समाप्त हो जाएगी और छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद का सूर्यास्त हो जाएगा।