अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को घोषणा की कि ईरान के साथ व्यापार करने वाला कोई भी देश अमेरिका के साथ अपने सभी व्यापार पर 25 प्रतिशत टैरिफ का भुगतान करेगा। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। ट्रम्प ने अपनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए लिखा, “तत्काल प्रभाव से, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ व्यापार करने वाला कोई भी देश अमेरिका के साथ अपने सभी व्यापार पर 25% टैरिफ देगा। यह आदेश अंतिम और निर्णायक है।”
यह फैसला ईरान में जारी बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के बीच आया है, जहां दिसंबर 2025 के अंत से आर्थिक संकट और मुद्रा अवमूल्यन के खिलाफ प्रदर्शन तेज हो गए हैं। इन विरोधों में सैकड़ों लोगों की मौत की खबरें हैं, और प्रदर्शन अब पूरे देश में फैल चुके हैं।
प्रमुख प्रभावित देश
ट्रम्प के इस कदम से चीन, भारत, तुर्की, रूस, इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदार सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। विशेष रूप से:
- भारत के लिए यह चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है, क्योंकि भारत ईरान से तेल और अन्य वस्तुओं का आयात करता है। हाल के वर्षों में भारत-ईरान द्विपक्षीय व्यापार लगभग 2.3 अरब डॉलर रहा है, हालांकि प्रतिबंधों के कारण यह घटा है।
- चीन ईरान का सबसे बड़ा तेल खरीदार है और अनुमान है कि वह ईरान के तेल निर्यात का 90% से अधिक हिस्सा लेता है।
ट्रम्प ने “व्यापार करने” की स्पष्ट परिभाषा नहीं दी है, जिससे यह अस्पष्ट है कि कौन से लेन-देन इसमें शामिल होंगे। यह टैरिफ अमेरिकी आयातकों पर लगेगा, जिससे उन देशों के सामान की कीमत अमेरिका में बढ़ जाएगी।
ईरानी रियाल का संकट: ऐतिहासिक गिरावट
ट्रम्प के ऐलान से पहले ही ईरान की मुद्रा रियाल (या टोमन में गणना) भारी गिरावट झेल रही है। अनौपचारिक बाजार में एक अमेरिकी डॉलर की कीमत अब लगभग 14.5 लाख से 14.7 लाख रियाल तक पहुंच गई है, जो रिकॉर्ड निचला स्तर है। यह 1979 की इस्लामी क्रांति के समय के मुकाबले हजारों गुना कमजोर है, जब एक डॉलर सिर्फ कुछ दर्जन रियाल था।
इस अवमूल्यन के कारण:
- मुद्रास्फीति दिसंबर 2025 में 50% से अधिक पहुंच गई।
- खाद्य पदार्थों की कीमतें 70% तक बढ़ीं।
- ईरान में बिजली और गैस की कमी, पानी का संकट और बेरोजगारी बढ़ी।
प्रदर्शन मुख्य रूप से बाजारों और व्यापारियों से शुरू हुए, जो मुद्रा के पतन से त्रस्त हैं। कई विश्लेषकों का मानना है कि आर्थिक संकट ही विरोधों का मुख्य कारण है, हालांकि यह अब राजनीतिक मांगों में बदल रहा है।
वैश्विक प्रतिक्रिया और प्रभाव
चीन ने इस फैसले को “जबरदस्ती” करार देते हुए विरोध जताया है। ईरान पहले से ही अमेरिकी प्रतिबंधों से जूझ रहा है, और यह नया कदम उसके व्यापारिक साझेदारों पर दबाव बढ़ाएगा। भारत जैसे देशों को अब ऊर्जा आयात के लिए वैकल्पिक स्रोत तलाशने पड़ सकते हैं, जिससे वैश्विक तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव आ सकता है।
ट्रम्प प्रशासन का कहना है कि यह ईरान पर दबाव बनाने का हिस्सा है, जहां सरकार विरोधी प्रदर्शनों को कुचल रही है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे वैश्विक व्यापार युद्ध और तेज हो सकता है, खासकर जब अमेरिका में ट्रम्प के अन्य टैरिफ पहले से ही कानूनी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।कई विश्लेषकों का मानना है कि आर्थिक संकट ही विरोधों का मुख्य कारण है, हालांकि यह अब राजनीतिक मांगों में बदल रहा है।