ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने नाबालिगों के साथ यौन शोषण के गंभीर आरोपों वाले मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत की मांग की है। इस याचिका पर शुक्रवार (27 फरवरी 2026) को जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ में सुनवाई हुई।
उत्तर प्रदेश सरकार ने शंकराचार्य की अग्रिम जमानत का विरोध किया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट में मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्य पेश किए गए, जिसमें पीड़ित नाबालिगों के साथ कुकर्म की पुष्टि होने का पुलिस पक्ष का दावा है। यदि जमानत नहीं मिलती है, तो पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर सकती है।
सुनवाई से पहले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मीडिया से कहा, “सच सामने आए, चाहे नार्को टेस्ट हो जाए। मैं इसके लिए पूरी तरह तैयार हूं।” उन्होंने आरोपों को पूरी तरह निराधार और बदनामी का षड्यंत्र बताया। उन्होंने आगे कहा कि यदि फैसला उनके पक्ष में नहीं आता है, तो वे सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे और झूठ की परतें खुलती दिख रही हैं।
झूंसी थाने में दर्ज एफआईआर में शंकराचार्य और उनके शिष्य मुकुंदानंद पर दो नाबालिग (14 और 17 वर्षीय) बटुकों के साथ लंबे समय तक यौन शोषण का आरोप है। मामला पॉक्सो एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की अन्य गंभीर धाराओं में दर्ज है। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने दावा किया कि पीड़ित माघ मेले के दौरान उनके पास पहुंचे और आश्रम में हुए शोषण की जानकारी दी। आरोपों में धमकियां, बिना कपड़ों सोने के लिए मजबूर करना और ‘गुरु सेवा’ के नाम पर शोषण शामिल है।
शंकराचार्य ने आरोप लगाने वाले पक्ष पर भी झूठे केस दर्ज कराने का दावा किया है और नार्को टेस्ट की पेशकश की है। मामले की जांच जारी है और हाईकोर्ट का फैसला महत्वपूर्ण होगा।