ईरानी तेल से लदा जहाज भारत के रास्ते से मुड़कर चीन की ओर बढ़ा

ईरान से करीब 6 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर आ रहे एक टैंकर ने अचानक अपना रास्ता बदल लिया है। यह जहाज गुरुवार रात तक अरब सागर में गुजरात के वाडिनार बंदरगाह की ओर बढ़ रहा था, लेकिन अब चीन की दिशा में मुड़ गया है।

जहाज का नाम पिंग शुन बताया जा रहा है। तेल बाजार की निगरानी करने वाली एक एजेंसी ने शुक्रवार को इसकी पुष्टि की कि जहाज ने भारत पहुंचने से ठीक पहले अपना गंतव्य बदल लिया। वैश्विक व्यापार डेटा इंटेलिजेंस कंपनी के रिफाइनरी और तेल बाजार मॉडलिंग प्रबंधक ने बताया कि पिछले तीन दिनों से पिंग शुन वाडिनार बंदरगाह की ओर जा रहा था, लेकिन गंतव्य के करीब पहुंचते ही उसने दिशा बदल ली।

बाजार सूत्रों के हवाले से उन्होंने कहा कि जहाज के रास्ता बदलने का मुख्य कारण ईरानी कच्चे तेल की खरीद में पेमेंट शर्तों में बदलाव है। पहले विक्रेता 30 से 60 दिनों की क्रेडिट अवधि देते थे, लेकिन अब वे एडवांस पेमेंट की मांग कर रहे हैं। पेमेंट मिलने के बाद ही तेल की खेप रवाना करने की बात हो रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ईरानी तेल के व्यापार में बीच रास्ते में गंतव्य बदलना पूरी तरह नया नहीं है, लेकिन यह घटना इस बात को रेखांकित करती है कि अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापार में वित्तीय शर्तें और काउंटरपार्टी रिस्क कितने संवेदनशील हो गए हैं।

अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस कार्गो को किस भारतीय रिफाइनरी ने खरीदा था। गुजरात के वाडिनार बंदरगाह के जरिए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), नायरा एनर्जी और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) जैसी कई बड़ी रिफाइनरियां कच्चा तेल आयात करती हैं।

सूत्रों ने संकेत दिया है कि अगर पेमेंट संबंधी मुद्दे सुलझ जाते हैं तो जहाज को अभी भी भारत की ओर मोड़ा जा सकता है। हालांकि, यह घटना साफ तौर पर दर्शाती है कि चीन के अलावा अन्य देशों में ईरानी तेल की आपूर्ति तय करने में लॉजिस्टिक्स के साथ-साथ वाणिज्यिक शर्तें भी अब उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई हैं।