अमेरिकी नाकाबंदी के बावजूद एक चीनी टैंकर ने होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर लिया। शिपिंग ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, रिच स्टारी नाम का यह टैंकर अमेरिकी प्रतिबंधों के अधीन है और चीन का स्वामित्व व चालक दल वाला है। यह मेथनॉल का भार लेकर चीन की ओर जा रहा था। नाकाबंदी शुरू होने के बाद खाड़ी से बाहर निकलने वाला यह पहला प्रमुख जहाज बन गया, जबकि कुछ अन्य टैंकर नाकाबंदी की खबर सुनकर मुड़ गए थे। यह घटना नाकाबंदी की प्रभावशीलता पर सवाल उठाती है।
इस घटना से ठीक पहले पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटे से अधिक समय तक चली शांति वार्ता बेनतीजा रही। वार्ता विफल होने का मुख्य कारण दोनों पक्षों के परमाणु कार्यक्रम पर अलग-अलग रुख थे। अमेरिका ने ईरान से यूरेनियम संवर्धन गतिविधियों को कम से कम 20 साल तक पूरी तरह रोकने की मांग की थी। इसके अलावा अमेरिका ने ईरान से परमाणु सुविधाओं को विघटित करने, पहले से संवर्धित यूरेनियम को वापस लेने और क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों को फंडिंग बंद करने जैसी शर्तें भी रखी थीं।
ईरान ने अमेरिकी मांग को ठुकराते हुए 5 साल तक संवर्धन गतिविधियां रोकने का प्रस्ताव रखा। ईरान परमाणु हथियार न बनाने की गारंटी देने को तैयार था, लेकिन लंबी अवधि की मांग को अत्यधिक और अस्वीकार्य बताया। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर बातचीत विफल करने का आरोप लगा रहे हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस वार्ता में प्रमुख अमेरिकी वार्ताकार थे।
वार्ता विफल होने के तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों पर नाकाबंदी शुरू करने का आदेश दिया। अमेरिकी सेना ने इसे 10 अप्रैल को सुबह 10 बजे (ईटी) से लागू किया। इसका मुख्य उद्देश्य ईरान की तेल निर्यात आय को रोककर उसे दबाव में लाना है, ताकि वह होर्मुज को बिना किसी टोल या रोक-टोक के पूरी तरह खोल दे और परमाणु मुद्दे पर समझौता करे। नाकाबंदी केवल ईरानी बंदरगाहों तक सीमित है; गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच यातायात की अनुमति दी गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के लगभग 20 प्रतिशत तेल परिवहन का महत्वपूर्ण मार्ग है। नाकाबंदी से वैश्विक तेल कीमतों में उछाल आया है। चीन, जो ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है, ने चेतावनी दी है कि उसके जहाज और टैंकर इस रूट से गुजरते रहेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अमेरिकी नौसेना किसी चीनी जहाज को रोकने की कोशिश करती है तो स्थिति और बिगड़ सकती है। दोनों पक्ष भविष्य में नई बातचीत की संभावना जता रहे हैं, लेकिन परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज नियंत्रण जैसे मुद्दों पर गहरी असहमति बनी हुई है।