नोएडा में फैक्ट्री मजदूरों का प्रदर्शन मंगलवार को एक बार फिर शुरू हो गया। सेक्टर 70, 80 और 120 में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच आमना-सामना हुआ। मजदूरों ने पुलिस पर पथराव किया, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें तितर-बितर कर दिया। एक बस पर भी पथराव की सूचना है। हालांकि पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने का दावा किया है, लेकिन आंदोलन अभी पूरी तरह शांत होने के संकेत नहीं दे रहा है।
मंगलवार सुबह 10 बजे तक नोएडा में माहौल शांत रहा। सोमवार को हुई हिंसा के बाद प्रशासन ने पूरे शहर में सख्त सुरक्षा व्यवस्था कर रखी है। पुलिस कमिश्नर समेत वरिष्ठ अधिकारी अलग-अलग औद्योगिक क्षेत्रों में मौजूद हैं। जगह-जगह फ्लैग मार्च हो रहा है और इसकी वीडियोग्राफी भी की जा रही है। सेक्टर-60, 62, 63 और फेज-2 के औद्योगिक इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
सोमवार को सबसे ज्यादा हिंसा सेक्टर-63 में हुई थी, जहां आईटी कंपनियों, फैक्टरियों और कार शोरूमों में तोड़फोड़ व आगजनी की गई। सेक्टर-63 थाने पर भी पथराव हुआ, जिसमें थानाध्यक्ष अमित काकरान घायल हो गए। कई पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया। पुलिस के अनुसार, शहर के 83 स्थानों पर करीब 42 हजार मजदूरों ने प्रदर्शन किया था। अब तक लगभग 300 लोगों को निवारक गिरफ्तारी के तहत हिरासत में भेजा जा चुका है। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अन्य उपद्रवियों की पहचान जारी है।
मजदूर इस प्रदर्शन के जरिए सैलरी बढ़ोतरी, तय कार्य घंटे और ओवरटाइम भुगतान जैसी मांगें रख रहे हैं। राज्य सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मजदूरों और उद्यमियों के साथ बातचीत शुरू कर दी है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने मजदूरों के साथ-साथ उद्योगपतियों को भी सुरक्षा का भरोसा दिलाया है। डीजीपी ने उपद्रवियों को सख्त चेतावनी दी है।
प्रशासन ने सोशल मीडिया पर सख्त नजर रखी हुई है ताकि अफवाहें न फैलें। नोएडा पुलिस ने सभी कर्मियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं और आसपास के जिलों से अतिरिक्त फोर्स बुलाई गई है। पीएसी और आरएएफ की कई कंपनियां तैनात की गई हैं। पुलिस का कहना है कि कहीं भी फायरिंग नहीं हुई। भ्रामक सूचनाएं फैलाने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
सीएम के निर्देश पर गठित हाई लेवल कमेटी की बैठक हो चुकी है। श्रम मंत्री अनिल राजभर ने हिंसा में बाहरी और देश-विरोधी तत्वों की भूमिका की जांच कराने की बात कही है। विपक्षी नेता अखिलेश यादव ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि मजदूरों की जायज मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है। हाईपावर कमेटी आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने वाली है।