भोजशाला केस में जैन समाज की एंट्री: अंबिका मंदिर होने का दावा, ASI रिपोर्ट के चिह्नों को बताया जैन परंपरा से जुड़ा

धार जिले के ऐतिहासिक भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद में अब जैन समाज ने भी पक्षकार बनने के लिए कोर्ट में अर्जी दाखिल की है। जैन समाज ने दावा किया है कि भोजशाला परिसर प्राचीन अंबिका देवी का मंदिर था और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्ट में मिले कई चिह्न जैन परंपरा से जुड़े हैं।

बुधवार को इंदौर हाईकोर्ट की धार खंडपीठ में जैन समाज के प्रतिनिधियों ने हस्तक्षेप याचिका लगाई। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ASI की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट में जो मूर्तियां, स्तंभ और शिलालेख मिले हैं, उन पर तीर्थंकरों के प्रतीक, यक्ष-यक्षिणी और अंबिका देवी की आकृतियां स्पष्ट हैं। अंबिका देवी जैन धर्म की प्रमुख शासन देवी मानी जाती हैं। समाज ने मांग की है कि परिसर की पहचान केवल हिंदू मंदिर या मस्जिद तक सीमित न रखी जाए, बल्कि जैन विरासत को भी मान्यता दी जाए।

गौरतलब है कि हाईकोर्ट के आदेश पर ASI ने 11 मार्च से 15 अगस्त 2024 तक भोजशाला का वैज्ञानिक सर्वे किया था। रिपोर्ट में हिंदू मंदिर के अवशेष मिलने की बात सामने आई थी। इसके बाद हिंदू पक्ष ने नियमित पूजा का अधिकार मांगा, जबकि मुस्लिम पक्ष ने रिपोर्ट को चुनौती दी। अब जैन पक्ष के आने से केस और पेचीदा हो गया है।

जैन समाज के वकील ने कोर्ट में कहा कि 11वीं शताब्दी में परमार राजा भोज के काल में यह जैन मंदिर था, जिसे बाद में परिवर्तित किया गया। उन्होंने ASI से मिले यक्षिणी, कमल, शंख और स्वस्तिक जैसे चिह्नों को सबूत के तौर पर पेश किया।

कोर्ट ने जैन समाज की याचिका स्वीकार करते हुए सभी पक्षों को नोटिस जारी किया है। अगली सुनवाई 18 जून को होगी। धार में प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ा दी है।