प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीदरलैंड की अपनी यात्रा के दौरान भारतीय समुदाय से मिलने पहुंचे। इसी दौरान नीदरलैंड सरकार ने चोल वंश की 11वीं शताब्दी की महत्वपूर्ण तांबे की पट्टिकाओं को भारत को सौंप दिया। यह सांस्कृतिक धरोहर की वापसी को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे प्रयासों का नतीजा है।
पट्टिकाओं का महत्व
ये पट्टिकाएं चोल राजा राजराज प्रथम और उनके पुत्र राजेंद्र चोल प्रथम के काल से जुड़ी हैं। इनमें चोल साम्राज्य द्वारा बौद्ध विहार को दिए गए भूमि अनुदान और अन्य दान का विस्तृत उल्लेख है। विशेष रूप से नागपट्टिनम के चूड़ामणि विहार से संबंधित ये दस्तावेज दक्षिण भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच प्राचीन व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और धार्मिक सहयोग के प्रमाण माने जाते हैं।
वापसी की कहानी
ये पट्टिकाएं 18वीं शताब्दी में डच ईस्ट इंडिया कंपनी के समय भारत से नीदरलैंड पहुंची थीं और लीडेन विश्वविद्यालय के संग्रह में संरक्षित थीं। भारत सरकार पिछले कई वर्षों से इनकी वापसी की मांग कर रही थी। हाल ही में यूनेस्को की दिशानिर्देशों और नीदरलैंड की नई सांस्कृतिक नीति के तहत यह प्रक्रिया पूरी हुई।
प्रधानमंत्री मोदी इस मौके पर भारतीय डायस्पोरा के सदस्यों से मुलाकात कर रहे हैं और थोड़ी देर में उन्हें संबोधित करने वाले हैं। उनकी इस यात्रा में द्विपक्षीय व्यापार, प्रौद्योगिकी, जल प्रबंधन और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों पर चर्चा भी हो रही है।