मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में हाल में आए तेज आंधी-तूफान और भारी बारिश ने केला उत्पादक क्षेत्रों में व्यापक तबाही मचा दी है। सैकड़ों हेक्टेयर में लगी खड़ी फसल जमींदोज हो गई, जिससे किसानों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। कई किसान मानसिक और शारीरिक तनाव से जूझ रहे हैं।
जिले के शाहपुर ब्लॉक समेत आसपास के दर्जनों गांवों में यह आपदा सबसे ज्यादा प्रभावित हुई। तेज हवाओं ने केले के पौधों को उखाड़ फेंका या तोड़ दिया, जिससे फल भी बर्बाद हो गए। प्रारंभिक अनुमानों के मुताबिक नुकसान 100 करोड़ रुपये से अधिक का है। कुछ क्षेत्रों में 25 से ज्यादा गांव प्रभावित बताए जा रहे हैं, जहां ढाई हजार हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में फसल प्रभावित हुई।
किसानों की हालत
प्रभावित किसानों का कहना है कि साल भर की मेहनत और निवेश रातोंरात बर्बाद हो गया। कई छोटे किसानों ने बैंक से कर्ज लेकर फसल लगाई थी, अब मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठे हैं। स्थानीय प्रशासन से फसल सर्वेक्षण और त्वरित सहायता की मांग जोर पकड़ रही है। कुछ किसानों की तबीयत भी खराब होने की सूचना है।
बुरहानपुर मध्य प्रदेश का प्रमुख केला उत्पादक क्षेत्र है। यहां की फसल न सिर्फ स्थानीय बाजार बल्कि अन्य राज्यों की आपूर्ति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस नुकसान से केले के भाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
मौसम की स्थिति
- मानसून में देरी: दक्षिण-पश्चिम मानसून इस बार मध्य प्रदेश में करीब 8-10 दिन की देरी से पहुंच रहा है। सामान्य तारीख से पीछे चल रहा मानसून अब 21-23 जून के आसपास प्रवेश कर सकता है।
- जून में बारिश घाटा: महीने के शुरुआती दिनों में कई इलाकों में औसत से काफी कम वर्षा दर्ज की गई। प्री-मानसून गतिविधियों के चलते आंधी-तूफान बढ़ गए, लेकिन समग्र बारिश अभी अपर्याप्त है। इससे खरीफ फसलों की बुवाई भी प्रभावित हो रही है।
सरकार और विपक्ष की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री कार्यालय और स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित किसानों के साथ सहानुभूति जताते हुए राहत कार्यों का आश्वासन दिया है। विपक्षी दलों ने तुरंत नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा देने की मांग की है। किसान संगठन मौसम आधारित फसल बीमा योजना को प्रभावी बनाने की पुरजोर वकालत कर रहे हैं।