MP को मिलीं 351 नई सरकारी बसें, गडकरी बोले- 40% प्रदूषण की जिम्मेदारी मेरी

मध्य प्रदेश में लंबे समय बाद सरकारी बस सेवा फिर से सड़कों पर लौटी है। शुक्रवार को राजधानी भोपाल में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का शुभारंभ किया। इस मौके पर सात शहरों के लिए कुल 351 नई बसें रवाना की गईं।

कार्यक्रम में बोलते हुए गडकरी ने वायु प्रदूषण को लेकर स्पष्ट रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि देश में होने वाले कुल एयर पॉल्यूशन का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा परिवहन क्षेत्र से आता है। ट्रांसपोर्ट मंत्री होने के नाते वे इसके लिए खुद को जिम्मेदार मानते हैं। उन्होंने जोर दिया कि प्रदूषण घटाने के लिए स्वच्छ ईंधन, इलेक्ट्रिक बसों और वैकल्पिक ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देना जरूरी है। देश हर साल पेट्रोल-डीजल आयात पर भारी रकम खर्च करता है, जिसे घटाकर जनता के हित में इस्तेमाल किया जा सकता है।

बस निर्माताओं को चेतावनी देते हुए गडकरी ने कहा कि बसों की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों में अभी भी सुधार की जरूरत है। उन्होंने साफ शब्दों में बताया कि अगर कंपनियां स्टैंडर्ड का पालन नहीं करेंगी तो उनके साथ भी वैसा ही सख्त रवैया अपनाया जाएगा जैसा ठेकेदारों के साथ किया जाता है। उन्होंने कहा कि गरीब यात्रियों को भी एयर कंडीशन्ड सुविधा मिलनी चाहिए और किराया डीजल बसों की तुलना में करीब 30 प्रतिशत कम होना चाहिए।

गडकरी ने बताया कि देश में प्रति हजार लोगों पर अभी औसतन दो बसें ही उपलब्ध हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आठ बसों की जरूरत बताई जाती है। मध्य प्रदेश में 25 हजार बसों तक पहुंचने की क्षमता है। केंद्र ने पीएम ई-बस योजना के तहत राज्य को 972 बसें मंजूर की हैं। सरकार का लक्ष्य पहले साल 1500 बसें और 2031 तक 15 हजार बसें चलाने का है।

नया बस बॉडी कोड लागू होने के बाद अब रजिस्ट्रेशन केवल जांच एजेंसी के प्रमाणन और वीडियो सत्यापन के बाद ही होगा। आरटीओ अधिकारियों को भी सख्ती का संदेश दिया गया।

सेवा का विस्तार

पहले चरण में इंदौर, भोपाल, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड में बसें चलाई जाएंगी। इनमें सबसे ज्यादा बसें इंदौर को मिली हैं। सभी बसें सीसीटीवी, पैनिक बटन और लाइव ट्रैकिंग जैसी आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं। संचालन निजी ऑपरेटर्स के जरिए होगा, जबकि सरकार निगरानी रखेगी।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस शुरुआत को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि गांव से शहर तक बेहतर कनेक्टिविटी मिलने से आम लोगों का सफर आसान होगा। मध्य प्रदेश में राज्य परिवहन निगम 2005 में बंद हो गया था। 21 साल बाद सरकारी नियंत्रण वाली यह सेवा फिर से शुरू हुई है।