मां नर्मदा और तवा नदी के संगम तट पर उमड़ा जनसैलाब

मेले में चाक चौबंद व्यवस्था के बीच श्रद्धालुओं ने किए स्नान

नर्मदापुरम्: मां नर्मदा और तवा के संगम स्थल पर प्रशासन की चाक चौबंद व्यवस्था के बीच हजारों श्रद्धालुओं ने स्नान का लाभ लिया। एक दिन पहले से पहुंच श्रद्धालुओं ने रेतीले मैदान का आनंद लिया गया। गुलाबी ठंड में सुबह होते ही सूर्य निकलने से पहले मां नर्मदा और तवा नदी के जल में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ लिया। दूरदराज से आए श्रद्धालुओं द्वारा संगम का मुख्य व्यंजन भर्ता और बाटी का आनंद लिया।

चाकचौबंद रही व्यवस्थाएं

श्रद्धालुओं के लिए पुलिस प्रशासन तथा होमगार्ड द्वारा व्यवस्था की गई। मोटरबोट से लगातार गश्ती की जा रही थी। गहरे पानी में न जाने की हिदायत के साथ नागरिकों सुरक्षा के संबंध में बताया जा रहा था। तवा एवं नर्मदा के संगम स्थल बांद्रा भान में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर सुबह से ही श्रद्धालुओं द्वारा कार्तिक पूर्णिमा का स्नान किया जा रहा है। घाटों पर स्नान क समय सुरक्षा के लिए होमगार्ड के जवान तैनात किए गए हैं। मोटर बोट लगातार गश्त कर रही है। जिला प्रशासन द्वारा सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई है। संगम तट बांद्रा भान में मेला भी लगाया गया है। मेले में झूले और स्थानीय व्यापारियों द्वारा लगाई गई दुकाने लोगों को आकर्षित कर रही हैं। गांव से दूर-दूर से लोग आए हुए लोग मेले का आनंद ले रहे हैं और स्थानीय दुकानों से सामान की खरीदारी भी कर रहे हैं।

परंपरागत मेले का बदला स्वरूप

जहां कभी श्रद्धालुगण एक दिन पहले ही बैलगाड़ी या पैदल ही आते थे वे अब चारपहिया वाहन या दो पहिया वाहन से आते हैं और स्रान कर वापिस चले जाते हैं। यातायात व्यवस्था सुगम होने से श्रद्धालुओं को पर्व लेना आसान हो गया है। वहीं कृषि यंत्रों की बात करें तो परंपरागत कृषि यंत्रों के साथ ही आधुनिक कृषि यंत्रों की भी दुकानें सजी हुइ थीं। जहां से किसानों द्वारा सामग्री खरीदी गई।

श्रद्धालुओं का उत्साह पूरा

लगातार हो रही बारिश के कारण मां नर्मदा का और तवा के जलस्तर में कमी नहीं होने के कारण रेत कम ही निकल पाई थी। जगह कम होने के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह भारी रहा। लोग आते रहे स्रान करते रहे जाते रहे। अलसुबह से शुरू हुआ पर्व देर शाम तक चलता रहा।

सेठानीघाट पर रात भर होते रहे भजन

दूर दराज से आने वाले श्रद्धालुओं द्वारा पर्व के एक दिन पहले से ही घाट पर डेरा डाल लिया था। सेठानीघाट सहित अन्य घाटों रुके श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पुलिस द्वारा बल तैनात किया गया था। श्रद्धालुओं द्वारा रात भर भजन गाकर सुबह 4 बजे का इंतजार करते रहे। सूर्य उदय होने से पूर्व स्रान किया और वे अपने घर रवाना हो गए।