भोपाल: जेपी अस्पताल का नया भवन 26 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद भी अभी तैयार नहीं हुआ है। यह भवन दिसंबर 2024 तक तैयार होना था। लेकिन, अब तक चार बार डेडलाइन बढ़ाई जा चुकी है। भवन में ऊपरी दो मंजिलों की छत से वायर और अन्य केबल लटक रही हैं। कार्डियक यूनिट, जिससे गरीब मरीजों को बड़ी राहत मिलने वाली थी। वो गायब हो चुकी है। ओटी अब तक नहीं बन सका है। ग्राउंड से लेकर तीसरे फ्लोर तक सिविल वर्क तो पूरा हो गया है, लेकिन जरूरी फर्नीचर, मॉनिटरिंग डिवाइस, ओपीडी चैम्बर के लिए उपकरण और ट्रॉमा यूनिट की मशीनें अब तक नहीं लगी हैं। चौथे फ्लोर पर फॉल्स सीलिंग तक नहीं बनी और इलेक्ट्रिकल वायरिंग खुले में लटक रही है। जेपी अस्पताल में रोजाना 2500 से ज्यादा मरीज इलाज के लिए आते हैं। पुराने भवन में जगह की कमी और सीमित ऑपरेशन थिएटरों के कारण मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। यही वजह थी कि नया भवन तेजी से तैयार करने का निर्णय लिया गया था। लेकिन अब अधूरा ढांचा अस्पताल प्रबंधन के लिए सिरदर्द बन गया है। राजधानी के जेपी अस्पताल की नई पांच मंजिला बिल्डिंग 31 अक्टूबर तक हैंडओवर होनी थी, लेकिन सिविल सर्जन डॉ. संजय जैन और पीडब्ल्यूडी इंजीनियरों के निरीक्षण में जब हकीकत सामने आई, तो अफसर भी हैरान रह गए। बिल्डिंग में इतनी कमियां मिलीं कि अब हैंडओवर प्रक्रिया को कुछ दिन और टालनी पड़ गई। प्रस्ताव में नई और पुरानी बिल्डिंग को कनेक्ट करना था, लेकिन यह अब तक नहीं हो पाया है। बिल्डिंग के पास का खुला नाला केवल स्लैब डालकर ढंका गया है। अब इसके चैनलाइजेशन के लिए नया बजट मांगा गया है। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और ईटीपी का निर्माण भी अधूरा है। अभी लाइनों को सीधे जोड़ा गया है, जिससे भविष्य में दिक्कतें आ सकती हैं। अब स्वास्थ्य आयुक्त स्तर की कमेटी बिल्डिंग की जांच करेगी। इसके बाद तय होगा कि अस्पताल की नई बिल्डिंग कब चालू हो पाएगी।