छत्तीसगढ़ में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए शुरू किए गए भारतमाला प्रोजेक्ट (रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर) पर भ्रष्टाचार का साया गहरा गया है। सोमवार की सुबह राजधानी रायपुर और महासमुंद सहित प्रदेश के 9 अलग-अलग ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापेमारी कर इस बहुचर्चित घोटाले की परतें खोलना शुरू कर दी हैं। रायपुर में भू-माफिया और एजेंट हरमीत सिंह खनूजा के ठिकानों पर दबिश दी गई, तो वहीं महासमुंद के मेघ बसंत इलाके में व्यवसायी जसबीर सिंह बग्गा के निवास को सुरक्षा बलों ने अपनी घेरेबंदी में ले लिया। यह पूरी कार्रवाई उस सिंडिकेट को बेनकाब करने के लिए की जा रही है, जिसने राजस्व अधिकारियों के साथ मिलकर सरकार को करीब 43 करोड़ रुपये का चूना लगाया है।
इस घोटाले की जड़ें जमीन अधिग्रहण के दौरान मुआवजे के निर्धारण में छिपी हैं। जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि अभनपुर क्षेत्र के ग्राम नायकबांधा और उरला में सरकारी जमीन और निजी संपत्तियों को नियमों के विरुद्ध जाकर छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट दिया गया। यह सब इसलिए किया गया ताकि मुआवजे की राशि को कई गुना बढ़ाया जा सके। राजस्व विभाग की गणना के अनुसार जिस जमीन का वास्तविक मुआवजा मात्र 29.5 करोड़ रुपये होना था, उसे हेरफेर के जरिए 70 करोड़ रुपये तक पहुंचा दिया गया। इस प्रक्रिया में 159 नए खसरे तैयार किए गए और रिकॉर्ड में 80 ऐसे नए नाम जोड़ दिए गए, जिनका उस जमीन से कोई वास्तविक संबंध नहीं था। इस पूरे खेल को अंजाम देने के लिए तत्कालीन एसडीएम, पटवारी और भू-माफियाओं ने बैक डेट (पुरानी तारीखों) पर सरकारी दस्तावेजों में प्रविष्टियां कीं।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार पहले ही कड़े कदम उठा चुकी है। दैनिक भास्कर डिजिटल द्वारा इस घोटाले को उजागर किए जाने के बाद, जांच रिपोर्ट के आधार पर कोरबा के डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे और जगदलपुर निगम कमिश्नर निर्भय साहू सहित पांच अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है। आरोप है कि इन अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए 43.18 करोड़ रुपये की राशि की बंदरबांट में मदद की। मुख्य एजेंट हरमीत सिंह खनूजा, जिन्हें पहले भी आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा गिरफ्तार किया जा चुका है, पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी दस्तावेजों और नकली म्यूटेशन के माध्यम से मुआवजे की राशि को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवाया।
वर्तमान में ED की यह कार्रवाई इस घोटाले के वित्तीय पहलुओं और मनी लॉन्ड्रिंग के कोण की जांच कर रही है। ठिकानों पर तैनात सुरक्षा बलों ने बाहरी हस्तक्षेप को पूरी तरह रोक दिया है और दस्तावेजों की सघन जांच जारी है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर अभनपुर बेल्ट में वितरण के लिए शेष 78 करोड़ रुपये के भुगतान पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह मामला न केवल प्रशासनिक भ्रष्टाचार को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे विकास योजनाओं के नाम पर सरकारी खजाने में सेंध लगाई गई।