शराब घोटाला: सौम्या चौरसिया की अग्रिम जमानत याचिका हाईकोर्ट से खारिज, EOW की गिरफ्तारी का खतरा बढ़ा

छत्तीसगढ़ के 3,200 करोड़ रुपए के कथित शराब घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की डिप्टी सेक्रेटरी रहीं सौम्या चौरसिया की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के बाद अब आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की गिरफ्तारी से बचने के लिए लगाई गई उनकी अग्रिम जमानत याचिका को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है।

EOW के प्रोडक्शन वारंट से बढ़ी घबराहट

सौम्या चौरसिया फिलहाल ईडी द्वारा दर्ज मामलों में जेल में बंद हैं। इस बीच, ईओडब्ल्यू ने उन्हें शराब घोटाले के मामले में पूछताछ के लिए ‘प्रोडक्शन वारंट’ पर लेने हेतु ईडी की विशेष अदालत में आवेदन दिया है। इसी संभावित गिरफ्तारी से बचने के लिए सौम्या ने हाईकोर्ट की शरण ली थी, लेकिन अदालत से उन्हें कोई राहत नहीं मिली।

बचाव पक्ष का तर्क: ‘राजनीतिक साजिश’

सौम्या चौरसिया के वकील हर्षवर्धन परगनिहा ने कोर्ट में दलील दी कि यह पूरी कार्रवाई एक सुनियोजित राजनीतिक षडयंत्र का हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि: ढाई साल पुराने इस मामले में सौम्या चौरसिया का कोई सीधा संबंध नहीं है। ईडी ने जानबूझकर मामले को ईओडब्ल्यू को सौंपा है ताकि उन्हें बार-बार गिरफ्तार कर परेशान किया जा सके।

क्या है 3,200 करोड़ का शराब घोटाला?

ईडी की जांच और एसीबी (ACB) में दर्ज एफआईआर के अनुसार, तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में एक सिंडिकेट सक्रिय था। इसमें आईएएस अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के पूर्व एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर मुख्य भूमिका में थे। जांच एजेंसी का दावा है कि इस सिंडिकेट के जरिए सरकारी खजाने को हजारों करोड़ की चपत लगाई गई, जिसमें राजनेता और रसूखदार अधिकारी शामिल थे।