भोपाल गोमांस घोटाला: गौर-शर्मा ने नामंजूर किया, अब ठीकरा प्रशासक पर!

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में नगर निगम के जिंसी इलाके स्थित आधुनिक स्लॉटर हाउस से जुड़े गोमांस मामले ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। हिंदू संगठनों के विरोध और कांग्रेस की नारेबाजी के बीच नगर निगम प्रशासन ने जिम्मेदारी पूर्व प्रशासक के कंधों पर डाल दी है। जांच में सामने आए दो महत्वपूर्ण पत्रों से अनियमितताओं का खुलासा हुआ है, जबकि पूर्व महापौर कृष्णा गौर (वर्तमान मंत्री) और पूर्व महापौर आलोक शर्मा (वर्तमान सांसद) ने अपने कार्यकाल में इस स्लॉटर हाउस से संबंधित प्रस्तावों को ठुकरा दिया था।

घटना की पूरी कहानी

17 दिसंबर 2025 की रात को हिंदू संगठनों ने पुलिस मुख्यालय (PHQ) के सामने एक संदिग्ध ट्रक को रोक लिया। ट्रक में लगभग 26 टन मांस लदा था, जो उत्तर प्रदेश रजिस्ट्रेशन नंबर वाला था। जांच में पता चला कि यह मांस जहांगीराबाद (जिंसी) स्थित पीपीपी मोड पर चल रहे नगर निगम के स्लॉटर हाउस से लोड किया गया था। मांस के पैकेटों पर क्यूआर कोड और विशेष टैग थे।

पुलिस ने नमूने जांच के लिए भेजे, और 8 जनवरी 2026 को लैब रिपोर्ट में गोमांस की पुष्टि हुई। इसके बाद स्लॉटर हाउस को तुरंत सील कर दिया गया। मुख्य आरोपी संचालक असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा और ड्राइवर शोएब को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। नगर निगम के वेटरनरी अधिकारी डॉ. बेनी प्रसाद गौर को सस्पेंड किया गया है, जबकि 11 अन्य कर्मचारियों पर कार्रवाई की तैयारी है।

प्रशासन की सफाई और ठीकरा फेंकने का खेल

नगर निगम ने साफ किया कि यह स्लॉटर हाउस पीपीपी मोड पर संचालित था, जहां निगम केवल जमीन उपलब्ध कराता है और संचालन निजी कंपनी का काम है। महापौर मालती राय ने कहा कि टेंडर 2022 में प्रशासक के समय हुआ था, और उनकी मेयर-इन-काउंसिल (एमआईसी) ने इसकी अनुमति नहीं दी।

दो पत्रों से गड़बड़ी उजागर हुई:

  • 24 अक्टूबर 2024 की एमआईसी बैठक में समय वृद्धि का प्रस्ताव पास हुआ, लेकिन नोटशीट में इसे महापौर परिषद का संकल्प बता दिया गया।
  • लीज की अवधि 20 साल बताई गई, जबकि नियमों के मुताबिक यह अलग होनी चाहिए थी।

निगम ने दोष पूरी तरह पूर्व प्रशासक, वेटरनरी विभाग और कुछ कर्मचारियों पर मढ़ दिया है।

गौर और शर्मा की पूर्व भूमिका

पूर्व महापौर कृष्णा गौर और आलोक शर्मा ने अपने समय में स्लॉटर हाउस से जुड़े कई प्रस्तावों को नामंजूर कर दिया था। यह फैसला धार्मिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखकर लिया गया था। वर्तमान महापौर के कार्यकाल में ही यह सुविधा चालू हुई, जिसके बाद विवाद फूट पड़ा।

विरोध और राजनीतिक बयानबाजी

हिंदू संगठनों (विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, करनी सेना) ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। उन्होंने स्लॉटर हाउस पर बुलडोजर चलाने और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। कांग्रेस ने नगर निगम परिषद बैठक में हंगामा किया, महापौर से इस्तीफे की मांग की और भाजपा पर गोमांस कारोबार में संलिप्तता का आरोप लगाया।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि सरकार ने गौमाता के नाम पर जनता को धोखा दिया। दूसरी ओर, नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का वादा किया। निगमायुक्त संस्कृति जैन ने कहा कि जांच चल रही है और जिम्मेदारों को नहीं बख्शा जाएगा।