ईरान में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों और गृहयुद्ध जैसे हालातों के बीच भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी का सिलसिला शुरू हो गया है। शुक्रवार और शनिवार की दरमियानी रात दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर जब भारतीयों का पहला जत्था पहुँचा, तो अपनों को देख कई यात्रियों की आँखें छलक आईं। हवाई अड्डे का परिसर “भारत माता की जय” और “मोदी है तो मुमकिन है” के नारों से गूँज उठा।
युद्ध जैसा मंजर और इंटरनेट का ब्लैकआउट
वतन लौटे नागरिकों, जिनमें मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर के एमबीबीएस छात्र और पेशेवर शामिल हैं, ने ईरान के भयावह जमीनी हालातों का खुलासा किया। छात्रों ने बताया कि वहां पिछले कई दिनों से इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह ठप्प हैं, जिसके कारण वे दुनिया से पूरी तरह कट गए थे। एक छात्र ने बताया, “सड़कों पर चारों तरफ धुआं और चीख-पुकार थी। प्रदर्शनकारी उग्र थे और सुरक्षा बल उन्हें काबू करने के लिए भारी बल प्रयोग कर रहे थे। हमें समझ नहीं आ रहा था कि कब क्या हो जाए।”
भारतीय उच्चायोग की सक्रियता और सुरक्षा कवच
मुश्किल घड़ी में तेहरान स्थित भारतीय उच्चायोग ने नागरिकों के लिए सुरक्षा कवच का काम किया। यात्रियों ने बताया कि दूतावास के अधिकारी लगातार उनके संपर्क में थे और उन्हें सुरक्षित कॉरिडोर के जरिए हवाई अड्डे तक पहुँचाने में मदद की गई। एक यात्री शब्बीर हुसैन ने कहा कि भारतीय दूतावास की सलाह और सहयोग के बिना वहां से निकलना लगभग नामुमकिन था। सरकार की इस मुस्तैदी ने विदेशी जमीन पर फंसे सैकड़ों भारतीयों को नई जिंदगी दी है।
ईरान में अशांति की मुख्य वजह
ईरान में यह संकट आर्थिक बदहाली, बेतहाशा महंगाई और नागरिक अधिकारों के हनन के खिलाफ शुरू हुआ है। प्रदर्शनकारियों और सरकार के बीच चल रही इस जंग में अब तक हजारों लोगों के मारे जाने की खबरें हैं। अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद स्थिति नियंत्रण से बाहर होती दिख रही है, जिसे देखते हुए भारत सरकार ने वहां रह रहे लगभग 9,000 भारतीयों को जल्द से जल्द देश लौटने की सख्त हिदायत दी है।
सरकार का अगला कदम
विदेश मंत्रालय स्थिति पर पल-पल की नजर बनाए हुए है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यदि नियमित उड़ानें बाधित होती हैं, तो वायुसेना के विमानों या विशेष चार्टर्ड उड़ानों के जरिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जाएगा। फिलहाल प्राथमिकता उन छात्रों और तीर्थयात्रियों को दी जा रही है जो प्रदर्शन के मुख्य केंद्रों के करीब फंसे हुए हैं।