अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को एक बड़े नीतिगत बदलाव का ऐलान करते हुए 8 यूरोपीय देशों पर प्रस्तावित 10% टैरिफ लगाने का फैसला वापस ले लिया है। यह टैरिफ 1 फरवरी से लागू होने वाला था। ट्रम्प ने यह निर्णय दावोस में NATO के महासचिव मार्क रुटे के साथ ग्रीनलैंड और आर्कटिक क्षेत्र के भविष्य को लेकर हुई सफल वार्ता के बाद लिया। ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पुष्टि की कि ग्रीनलैंड डील के नए फ्रेमवर्क पर सहमति बन गई है, जिससे अब व्यापार युद्ध का खतरा टल गया है।
ग्रीनलैंड और ‘गोल्डन डोम’ प्रोजेक्ट का क्या है कनेक्शन?
समझौते के तहत अमेरिका को ग्रीनलैंड के कुछ रणनीतिक इलाकों में अपने सैन्य ठिकाने बनाने की अनुमति मिल सकती है। इन ठिकानों का मुख्य उद्देश्य जमीन, समुद्र और हवा के जरिए सुरक्षा निगरानी करना है।
- गोल्डन डोम: यह अमेरिका का महत्वाकांक्षी मिसाइल डिफेंस सिस्टम है, जो इजराइल के ‘आयरन डोम’ से प्रेरित है। ट्रम्प ग्रीनलैंड को इस सुरक्षा कवच के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र मानते हैं।
- रणनीतिक सुरक्षा: समझौते के अनुसार, अमेरिका और NATO मिलकर आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन के आर्थिक व सैन्य प्रभाव को रोकेंगे। साथ ही, ग्रीनलैंड के खनिज संसाधनों के दोहन में भी अमेरिका की हिस्सेदारी होगी।
8 देशों पर मंडरा रहा था आर्थिक संकट
इससे पहले 17 जनवरी को ट्रम्प ने डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूके, नीदरलैंड और फिनलैंड पर टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि ग्रीनलैंड डील पर बात नहीं बनी, तो 1 जून से इस टैरिफ को बढ़ाकर 25% कर दिया जाएगा। जवाब में यूरोपीय यूनियन ने भी जवाबी व्यापारिक पाबंदियों की तैयारी शुरू कर दी थी, लेकिन अब मार्क रुटे और ट्रम्प के बीच हुई इस ‘फ्रेमवर्क डील’ ने फिलहाल तनाव को शांत कर दिया है।