अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप को मारने की एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय आतंकी साजिश अमेरिकी एजेंसियों ने उजागर कर दी है। इस साजिश का मुख्य आरोपी ईरान समर्थित इराकी आतंकवादी मोहम्मद बाकिर साद दाऊद अल-सादी है, जिसे 15 मई 2026 को तुर्की से गिरफ्तार किया गया। वह उस समय रूस भागने की तैयारी में था। बाद में उसे अमेरिका प्रत्यर्पित कर दिया गया।
जांच में पता चला है कि अल-सादी ने 2020 में बगदाद में अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे गए ईरानी कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेने के लिए यह प्लान बनाया था। वह सुलेमानी को पिता के समान मानता था। उसके पास से इवांका ट्रंप के फ्लोरिडा स्थित आवास का नक्शा बरामद हुआ है। अल-सादी ने सोशल मीडिया पर खुलकर धमकियां दी थीं कि अमेरिकी सीक्रेट सर्विस भी इवांका और उनके पति को नहीं बचा पाएगी। इवांका ट्रंप ने शादी के बाद यहूदी धर्म अपनाया था, जिसे भी साजिश का एक कारण माना जा रहा है।
अल-सादी कताइब हिजबुल्लाह का सक्रिय सदस्य है और उसे ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) से प्रशिक्षण मिला था। वह यूरोप और अमेरिका में कुल 18 आतंकी हमलों व कोशिशों से जुड़ा हुआ है। इनमें मार्च 2026 में एम्स्टर्डम के एक बैंक पर बम विस्फोट, टोरंटो में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पर गोलीबारी, लंदन में यहूदियों पर चाकू हमले और बेल्जियम व रॉटरडैम में धार्मिक स्थलों पर आगजनी की घटनाएं शामिल हैं।
गिरफ्तारी के समय उसके पास इराक का विशेष वीआईपी पासपोर्ट मिला, जो आमतौर पर प्रधानमंत्री की मंजूरी से ही जारी होता है। इस पासपोर्ट की मदद से वह आसानी से विभिन्न देशों में घूमता रहा। उसने आतंकी नेटवर्क चलाने के लिए एक ट्रैवल एजेंसी भी संचालित की थी। सोशल मीडिया पर वह पर्यटन स्थलों की तस्वीरों के साथ साइलेंसर वाली पिस्तौल की तस्वीरें पोस्ट कर लोगों को डराता था।
फिलहाल अल-सादी को न्यूयॉर्क की ब्रुकलिन जेल में उच्च सुरक्षा वाली एकांत कोठरी में रखा गया है। अमेरिकी न्याय विभाग ने उसके खिलाफ गंभीर आतंकवाद के आरोप दर्ज कर लिए हैं। इवांका ट्रंप और उनके परिवार को अतिरिक्त सुरक्षा मुहैया कराई गई है। यह मामला ईरान समर्थित आतंकी समूहों की बढ़ती गतिविधियों को लेकर नई चिंता पैदा कर रहा है।