प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दिग्गज उद्योगपति अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाले वेदांता ग्रुप के विभिन्न परिसरों पर अचानक छापेमारी की है। सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के संभावित उल्लंघनों से जुड़े मामलों की जांच को लेकर की जा रही है। छापेमारी के बाद कारोबारी जगत में चर्चा तेज हो गई है, हालांकि कंपनी की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
फेमा के तहत क्यों कार्रवाई?
ईडी आमतौर पर फेमा के अंतर्गत तब कार्रवाई करता है जब विदेशी मुद्रा के लेन-देन में अनियमितताओं का संदेह होता है। इसमें अवैध धन हस्तांतरण, विदेश में बिना अनुमति संपत्ति बनाना या विदेशी निवेश संबंधी सरकारी दिशानिर्देशों का पालन न करना शामिल हो सकता है। फेमा का मुख्य मकसद भारत में विदेशी मुद्रा लेन-देन को पारदर्शी और नियंत्रित रखना है। वेदांता ग्रुप का कारोबार कई देशों में फैला होने के कारण विदेशी लेन-देन से जुड़ी जांच अब सामने आई है।
पहले भी रहा है रडार पर
यह पहली बार नहीं है जब वेदांता समूह जांच एजेंसियों के निशाने पर आया हो। वर्ष 2004 में स्टर्लाइट इंडस्ट्रीज और उसके तीन प्रमोटर डायरेक्टर्स को फेरा तथा फेमा नियमों के उल्लंघन का दोषी ठहराया गया था, जिसके बाद कंपनी और संबंधित अधिकारियों पर भारी जुर्माना लगाया गया था।
देश की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका
वेदांता भारत की प्रमुख बहुराष्ट्रीय कंपनियों में शुमार है। यह एल्युमिनियम उत्पादन के लिए जानी जाती है और देश की कुल जिंक जरूरत का करीब 81 प्रतिशत उत्पादन अकेले इसी समूह के जरिए होता है। कैर्न इंडिया के माध्यम से कच्चे तेल के उत्पादन में भी कंपनी सक्रिय है। वेदांता ने अगले कुछ वर्षों में भारत में करीब दो लाख करोड़ रुपये के बड़े निवेश की योजना बनाई है।