ईरान ने अमेरिका को खार्ग आइलैंड पर किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई के खिलाफ फिर से चेतावनी जारी की है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अगर अमेरिकी फौज इस द्वीप पर कब्जा करने की कोशिश करती है तो कोई भी सैनिक सुरक्षित वापस नहीं लौट पाएगा।
ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के एक प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका ने हाल के समझौते का उल्लंघन किया है। उन्होंने साफ शब्दों में चेताया, “हम अमेरिकी सैनिकों का इंतजार कर रहे हैं। खार्ग पर हमला करने की कोई कोशिश हुई तो नतीजा बहुत भारी होगा।”
खार्ग आइलैंड क्यों इतना अहम?
खार्ग द्वीप फारस की खाड़ी में स्थित ईरान का प्रमुख तेल निर्यात केंद्र है। यहां से देश का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल विदेश भेजा जाता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल में इस द्वीप पर नियंत्रण हासिल करने या इसके तेल ढांचे को निशाना बनाने की बात कही थी, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते विवाद के बीच।
पहले मार्च में अमेरिका ने द्वीप पर सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था, लेकिन तेल सुविधाओं को छोड़ दिया गया। उसके बाद से दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बना हुआ है।
ईरान की तैयारियां
ईरान ने खार्ग द्वीप की सुरक्षा बढ़ा दी है। वहां माइन्स बिछाए गए हैं, एयर डिफेंस सिस्टम मजबूत किया गया है और अतिरिक्त सैनिक तैनात किए गए हैं। ईरानी सेना असममित युद्ध की रणनीति पर भरोसा जताते हुए कह रही है कि वे अमेरिकी हमले का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार हैं।
अमेरिका के लिए कितना मुश्किल?
सैन्य विशेषज्ञों का अनुमान है कि द्वीप पर कब्जा करना मुश्किल नहीं होगा, लेकिन उसे लंबे समय तक अपने कब्जे में रखना बहुत जोखिम भरा साबित हो सकता है। द्वीप ईरानी मुख्य भूमि के बहुत करीब है, जिससे मिसाइल और ड्रोन हमलों का खतरा बना रहता है। अमेरिका को हजारों सैनिकों की जरूरत पड़ सकती है, जिसमें भारी नुकसान की आशंका भी है।
ईरान के संसद अध्यक्ष ने पहले भी कहा था कि उनकी सेनाएं अमेरिकी सैनिकों के आने का इंतजार कर रही हैं और वे किसी भी घुसपैठ का सख्त जवाब देंगी।