अमेरिकी सैन्य बलों ने ईरान के विभिन्न इलाकों पर हवाई हमले जारी रखे हैं। यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित बनाने और ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने के लिए की जा रही है। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स में दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी तटीय क्षेत्रों सहित कई जगहों पर विस्फोटों की सूचना मिली है।
हमलों की ताजा स्थिति
अमेरिकी सेना ने जुलाई के दूसरे सप्ताह से लगातार रातों में स्ट्राइक्स किए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल ही में 10वीं रात और उसके बाद भी हमले जारी रहे। मुख्य निशाने ईरान के तटीय सैन्य ठिकाने, मिसाइल-ड्रोन सुविधाएं, एयर डिफेंस सिस्टम और बंदरगाह संबंधी बुनियादी ढांचे रहे।
प्रभावित इलाकों में बंदर अब्बास, अहवाज, कोनारक, सिरिक, जास्क, चाबहार और क़ेश्म द्वीप जैसे क्षेत्र शामिल बताए जा रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में पांच या इससे अधिक शहरों/इलाकों में हमलों का जिक्र है। ईरानी समाचार एजेंसियों ने इन हमलों में स्थानीय स्तर पर क्षति और हताहतों की भी खबर दी है।
ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई में पड़ोसी देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने के दावे किए गए हैं। दोनों पक्षों के बीच यह टकराव सीजफायर समझौते के बावजूद बढ़ता जा रहा है।
युद्ध पर खर्च का अनुमान
इस पूरे संघर्ष में अमेरिका का खर्च अब अरबों डॉलर तक पहुंच चुका है। विभिन्न थिंक टैंकों के आंकड़ों के अनुसार, सैन्य अभियानों, हथियारों, बुनियादी ढांचे की मरम्मत और क्षेत्रीय तैनाती पर लगभग 34 से 42 अरब डॉलर (करीब 2.8 से 3.5 लाख करोड़ रुपये) का खर्च हो चुका है। कुछ व्यापक अनुमानों में ईंधन मूल्य वृद्धि जैसे अप्रत्यक्ष प्रभावों को जोड़कर कुल लागत इससे भी ज्यादा बताई जा रही है।