मध्य प्रदेश में जुलाई महीने के दौरान बीच-बीच में बारिश के दो बड़े अंतराल के बावजूद मासिक लक्ष्य हासिल कर लिया गया, लेकिन जून की कमी के कारण पूरे मानसून सीजन में अभी भी 13 प्रतिशत की कमी बनी हुई है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, राज्य के 55 जिलों में से 42 जिलों में अब तक औसत से कम वर्षा दर्ज की गई है।
भोपाल मौसम केंद्र के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से अब तक प्रदेश में औसतन 390.3 मिलीमीटर (लगभग 15.4 इंच) बारिश हुई है, जबकि इस अवधि में 448.4 मिलीमीटर (17.6 इंच) बारिश होनी चाहिए थी। इस तरह कुल 13 प्रतिशत घाटा है। पूर्वी हिस्से में यह कमी 15 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में 11 प्रतिशत है।
42 जिलों में कम बारिश
अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, सीधी, सिंगरौली, आगर-मालवा, अलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, धार, गुना, ग्वालियर, हरदा, झाबुआ, भोपाल, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा शामिल हैं।
उल्टे 13 जिलों में स्थिति बेहतर है, जहां बारिश सामान्य या उससे ज्यादा हुई है। इनमें देवास, इंदौर, भिंड, बुरहानपुर, खंडवा, बड़वानी, खरगोन, राजगढ़, सीहोर, शहडोल, टीकमगढ़, उमरिया और मऊगंज प्रमुख हैं।
आगे का मौसम
मौसम विभाग ने बताया कि सक्रिय सिस्टम कमजोर हो रहे हैं, इसलिए अगले चार दिनों में राज्य में कहीं भी भारी या बहुत भारी बारिश की संभावना नहीं है। कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, लेकिन व्यापक राहत की उम्मीद अगस्त में ज्यादा है।
जून में भी बारिश औसत से 14 प्रतिशत कम हुई थी, जिसका असर पूरे सीजन पर पड़ रहा है। जुलाई में अच्छी बारिश के बावजूद कुल घाटा कम होने में समय लगेगा।