उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के अहरौला थाना क्षेत्र अंतर्गत शंभूपुर गांव में मंगलवार शाम एक दर्दनाक घटना सामने आई। अरविंद सिंह नाम के व्यक्ति ने घर में हो रही धार्मिक पूजा के दौरान अपनी पत्नी बबीता सिंह, दो पुजारियों महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्रा को लाइसेंसी हथियार से गोली मार दी। इसके बाद उसने अपने तीन बच्चों को कमरे में बंधक बना लिया। लगभग 7-8 घंटे चले तनावपूर्ण ऑपरेशन के दौरान उसने अपने बेटे को भी गोली मार दी। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में अरविंद घायल हुआ और अस्पताल में उसकी मौत हो गई। इस पूरे प्रकरण में कुल पांच लोगों की जान चली गई।
अरविंद शाम करीब छह बजे घर पहुंचा तो पत्नी बबीता और पुजारी महामृत्युंजय पाठ या भाई की आत्मा की शांति हेतु अनुष्ठान कर रहे थे। परिवार के अनुसार यह पूजा उसके दिवंगत भाई की आत्मा की शांति या कथित साये से मुक्ति के लिए आयोजित की गई थी। अरविंद इस पूजा का विरोध करता रहा था। उसने पुजारियों से पहचान पत्र मांगा, विवाद बढ़ गया और वह उत्तेजित हो गया। उसने पहले पत्नी पर और फिर दोनों पुजारियों पर गोली चला दी। कुछ अन्य पुजारी वहां से भाग निकले।
इसके बाद अरविंद अपने तीन बच्चों लगभग आठ से दस वर्ष के बेटे शौर्य, बेटी परी और करीब छह-ग्यारह महीने की छोटी बेटी को लेकर एक कमरे में बंद हो गया। उसने बच्चों को मारने की धमकी दी। पुलिस, विशेष अभियान दल और एटीएस की टीमें मौके पर पहुंचीं और घेराबंदी कर ली। बार-बार समझाने के बावजूद अरविंद ने सरेंडर करने से इनकार कर दिया। रात में कमरे से गोली की आवाज सुनाई दी उसने अपने बेटे को गोली मार दी थी। पुलिस ने स्टन ग्रेनेड और टियर गैस का उपयोग कर जबरन प्रवेश किया। अरविंद ने पुलिस पर भी फायरिंग की, जवाबी गोलीबारी में वह घायल हो गया। घायल अरविंद और उसके बेटे को अस्पताल ले जाया गया, जहां दोनों की मौत हो गई। दो बेटियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। ऑपरेशन के दौरान छोटी बेटी घबराहट में उसके हाथ से गिर गई थी, पर वह सुरक्षित रही।
आजमगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और वाराणसी जोन के अपर पुलिस महानिदेशक ने बताया कि बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कार्रवाई की गई। अरविंद ने बच्चों को अपनी सुरक्षा के लिए ढाल की तरह इस्तेमाल किया था। मौके पर सबूत एकत्र किए जा रहे हैं और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।