भोपाल में अब ई-रिक्शा को लेकर नई व्यवस्था बनाई जा रही है। इस व्यवस्था के अंतरगर्त ट्रैफिक को देखते हुए ई-रिक्शा के लिए कलर कोड, क्यूआर कोड और डिविजन के आधार पर रुट तय किए जाएंगे।
12 हजार ई-रिक्शा को व्यवस्थित करना है बड़ी समस्या
ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि शहर में अभी करीब 12 हजार ई-रिक्शा है जिन्हें शहर में मैनेज करना एक बड़ी समस्या है। ऐसे में इस नई व्यवस्था से शहर में बेहतर तरीके से व्यवस्थित संचालन हो सकता है। कलर कोड , क्यूआर कोड और डिवीजन के आधार पर इनके लिए नए रूट तय किए जाएंगे। ई-रिक्शा को रेसिडेंसियल कॉलोनियों और उनसे जुडऩे वाली गलियों में ही चलने की अनुमति होगी। जिससे शहर का ट्रैफिक कंट्रोल रहेगा।
जाने नई व्यवस्था में क्या है
ई-रिक्शा के संचालन की नई व्यवस्था में रजिस्ट्रेशन और परमिट अनिवार्य किया जाएगा। जिससे कलर कोडिंग और जोनिंग की जाएगी। ऐसे में शहर को विभिन्न जोन में बाँटा जाएगा। हर जोन के लिए एक स्पेशल रंग का कोड निर्धारित होगा। ऐसे में ई-रिक्शा को उनके निर्धारित मार्गों को दिखाने के लिए रंगीन स्टिकर दिए जाएंगे जिससे अलग जोन का पता लगाया जा सके। यह प्रणाली दिल्ली जैसे शहरों में पहले से ही लागू है। ऐसे में भोपाल की ट्रैफिक व्यवस्था के लिए ये एक अच्छा कदम हो सकता है।
क्या है इसका उद्देश्य?
इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य भोपाल में यातायात की भीड़ को कम करना है जिससे विशिष्ट और प्रमुख मार्गों पर ई-रिक्शा का जमावड़ा कम या प्रतिबंधित किया जा सके। ऐसे में इसकी बैठक में ई रिक्शा चलाने वालो के अलावा परिवहन विभाग, जिला प्रशासन और नगर निगम के अधिकारी शामिल हुए थी। अब 27 तारीख को होने वाली बैठक में इस व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जाएगा।