भारत में AI से बढ़ा साइबर अपराध: 10 में से 8 धोखाधड़ी में AI का इस्तेमाल, $2.78 बिलियन का नुकसान

AI Cybercrime in India: भारत डिजिटल युग में तेजी से प्रगति कर रहा है, लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराधी भी अपनी तकनीकों को उसी गति से उन्नत कर रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) उपकरण अब साइबर अपराध का एक नया और खतरनाक माध्यम बन गए हैं। हाल ही में आई एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हुए दस में से आठ साइबर धोखाधड़ी के मामलों में AI का उपयोग किया गया है, जिससे देश को डिजिटल धोखाधड़ी के कारण 2.78 बिलियन डॉलर का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। आइए इस गंभीर खतरे को विस्तार से समझते हैं।

AI-पावर्ड साइबरक्राइम: रिपोर्ट के चौंकाने वाले खुलासे

GIREM (ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर रिस्ट्रक्चरिंग एनवायरनमेंट एंड मैनेजमेंट) और ऑटोमोटिव टेक कंपनी Tekion की संयुक्त रिपोर्ट ‘द स्टेट ऑफ एआई-पावर्ड साइबरक्राइम: थ्रेट एंड मिटिगेशन रिपोर्ट 2025’ ने साइबर अपराध के बारे में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। कर्नाटक के पुलिस महानिदेशक और महानिरीक्षक (DG&IGP) एम ए सलीम ने बुधवार को बेंगलुरु में इस रिपोर्ट को प्रस्तुत किया।

रिपोर्ट बताती है कि साइबर अपराधी AI उपकरणों का उपयोग होटल चेन और रेस्तरां को अत्यधिक परिष्कृत फ़िशिंग ईमेल भेजने के लिए कर रहे हैं। इन ईमेल में अक्सर AI-जनरेटेड टेम्प्लेट का इस्तेमाल करके बड़े ब्रांड्स का रूप धारण किया जाता है, जिससे वे वास्तविक प्रतीत होते हैं। ईमेल टेक्स्ट के अलावा, AI का उपयोग वास्तविक दिखने वाले डैशबोर्ड बनाने, नकली डोमेन पंजीकृत करने और इंटरैक्टिव फ़िशिंग पेज बनाने के लिए भी किया जाता है, जिससे उपयोगकर्ताओं को धोखे का एहसास नहीं होता। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि देश में 80 प्रतिशत फ़िशिंग मेल में AI टूल का उपयोग हुआ था, जिसका अर्थ है कि हर 10 फ़िशिंग मामलों में से 8 में AI का इस्तेमाल किया गया था।

साइबर धोखाधड़ी का बढ़ता ग्राफ और वित्तीय नुकसान

रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, भारत में पिछले साल 1.91 मिलियन से अधिक साइबर अपराध की शिकायतें दर्ज की गईं, जबकि 2023 में यह आंकड़ा 1.55 मिलियन से अधिक था। यह आंकड़ा 2019 में दर्ज अपराधों से 10 गुना ज्यादा है, जो साइबर अपराधों की खतरनाक वृद्धि को दर्शाता है। इनमें सबसे अधिक वित्तीय धोखाधड़ी के मामले सामने आए। बीते साल में भारतीयों को साइबर अपराधों के कारण 2.78 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ, जो कि 2023 के मुकाबले में लगभग 3 गुना और 2022 के मुकाबले में लगभग 10 गुना अधिक है। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि साइबर अपराधी किस तेजी से वित्तीय तंत्र को निशाना बना रहे हैं।

विभिन्न प्रकार के हमलों में वृद्धि और कमजोर वर्गों पर प्रभाव

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2024 में क्रिप्टो अटैक के मामले में भारत दुनिया भर में अमेरिका के बाद दूसरा सबसे ज्यादा प्रभावित देश है, जहां 95 ऐसे मामले सामने आए। देश में मैलवेयर में 11%, रैंसमवेयर में 22% और IoT अटैक में 59% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, क्रिप्टो अटैक में कुल मिलाकर 409% की आश्चर्यजनक वृद्धि हुई है, जो इस क्षेत्र में बढ़ते खतरे को उजागर करता है।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन साइबर हमलों का सबसे अधिक शिकार समाज के कमजोर वर्गों जैसे वरिष्ठ नागरिकों, बच्चों और महिलाओं को बनाया जाता है। आज के समय में साइबर अपराध से निपटना देश के लिए एक बड़ा मुद्दा बन गया है, क्योंकि भारत में 2025 तक 900 मिलियन से अधिक इंटरनेट यूजर्स होने का अनुमान है। यह स्थिति साइबर सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने की आवश्यकता पर बल देती है।