‘कांटा लगा’ फेम शेफाली जरीवाला का निधन, कार्डियक अरेस्ट बना मौत की वजह: जानिए इस जानलेवा स्थिति के लक्षण और बचाव के उपाय

एक समय था जब देशभर में “कांटा लगा… हाय लगा” गाने की गूंज सुनाई देती थी। इस गाने से रातोंरात मशहूर हुईं एक्ट्रेस शेफाली जरीवाला ने करोड़ों लोगों के दिलों में अपनी खास जगह बनाई थी। लेकिन अब बॉलीवुड से एक दुखद खबर सामने आई है—42 साल की उम्र में शेफाली जरीवाला का निधन हो गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, मुंबई में उन्होंने आखिरी सांस ली और उनकी मौत का कारण कार्डियक अरेस्ट बताया गया है।

हालांकि यह पहली बार नहीं है जब किसी कलाकार की जान इस गंभीर स्थिति ने ले ली हो। हाल के वर्षों में कई यंग और हेल्दी नजर आने वाले लोगों की मौत इसी कारण से हो चुकी है। ऐसे में यह समझना बेहद जरूरी है कि कार्डियक अरेस्ट क्या होता है, इसके खतरे क्या हैं और इससे बचाव कैसे किया जा सकता है।

कार्डियक अरेस्ट क्या होता है?

कार्डियक अरेस्ट एक ऐसी स्थिति है, जब हृदय की धड़कन अचानक और अनियमित रूप से रुक जाती है। सामान्यतः दिल लगातार धड़कता रहता है ताकि पूरे शरीर को ऑक्सीजन युक्त खून पहुंचाया जा सके। लेकिन जब कार्डियक अरेस्ट होता है, तब दिल की पम्पिंग क्रिया बंद हो जाती है और शरीर को खून मिलना रुक जाता है। इससे व्यक्ति कुछ ही मिनटों में बेहोश हो सकता है और उसकी सांसें भी रुक जाती हैं। यदि सही समय पर CPR (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) या डिफिब्रिलेटर से शॉक न दिया जाए, तो मरीज की मौत कुछ ही पलों में हो सकती है।

हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में फर्क

बहुत से लोग कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक को एक ही समझते हैं, जबकि ये दोनों बिल्कुल अलग मेडिकल स्थितियां हैं। हार्ट अटैक तब होता है जब हृदय की मांसपेशियों को रक्त की आपूर्ति बाधित हो जाती है, आमतौर पर ब्लड क्लॉट या आर्टरी में ब्लॉकेज के कारण। इसके लक्षणों में छाती में दर्द, पसीना आना, उलझन और सांस फूलना शामिल हैं।

वहीं दूसरी ओर, कार्डियक अरेस्ट में दिल की धड़कनें अचानक रुक जाती हैं, जिससे मस्तिष्क और शरीर के अन्य अंगों तक खून पहुंचना बंद हो जाता है। यह एक आपातकालीन स्थिति है, जहां वक्त ही जीवन और मृत्यु के बीच का फासला तय करता है।

किन कारणों से होता है कार्डियक अरेस्ट?

विशेषज्ञों के अनुसार, कार्डियक अरेस्ट के पीछे कई तरह के कारण हो सकते हैं। कोरोनरी आर्टरी डिजीज, यानी हृदय की नसों का संकरा या ब्लॉक हो जाना, इसका सबसे आम कारण है। इसके अलावा, जिन्हें पहले कभी हार्ट अटैक हो चुका है, उन पर भी इसका खतरा अधिक होता है।

दिल की मांसपेशियों से जुड़ी बीमारियां, जन्मजात हृदय दोष, अत्यधिक मानसिक तनाव, शरीर में पोटैशियम या मैग्नीशियम की कमी, हाई ब्लड प्रेशर, अत्यधिक शराब या नशे का सेवन, यहां तक कि बिजली का झटका लगना भी कार्डियक अरेस्ट को जन्म दे सकता है।

बढ़ती उम्र और खराब जीवनशैली इस स्थिति को और गंभीर बना सकती हैं। दुर्भाग्यवश, इनमें से कई कारक ऐसे होते हैं जिनका शुरू में पता ही नहीं चलता और व्यक्ति को तब चेतना आती है जब बहुत देर हो चुकी होती है।

कितनी गंभीर है यह स्थिति?

कार्डियक अरेस्ट को चिकित्सा विज्ञान में “साइलेंट किलर” कहा जाता है क्योंकि यह बिना किसी पूर्व चेतावनी के भी हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में 50% से अधिक मामलों में व्यक्ति अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देता है।

शेफाली जरीवाला की दुखद मृत्यु इसी कड़ी में एक और उदाहरण है, जहां समय पर चिकित्सकीय सहायता न मिलने से जान नहीं बच सकी। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कार्डियक अरेस्ट के तीन से पांच मिनट के अंदर CPR और डिफिब्रिलेटर का इस्तेमाल कर लिया जाए, तो मरीज की जान बचाई जा सकती है।

कार्डियक अरेस्ट से बचाव के तरीके

कार्डियक अरेस्ट से बचाव के लिए जरूरी है कि हम अपने हृदय की नियमित जांच कराते रहें। यदि किसी को हाई बीपी, शुगर या कोलेस्ट्रॉल की समस्या है तो उसे कंट्रोल में रखना अनिवार्य है। इसके अलावा धूम्रपान और शराब जैसी आदतों से दूरी बनाना, मानसिक तनाव को कम करना, और नियमित व्यायाम करना हृदय को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है।

साथ ही हेल्दी डाइट, पर्याप्त नींद और डॉक्टर से समय-समय पर सलाह लेना इस जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है। जरूरी हो तो ECG या ECHO जैसी जांचें करवाकर समय रहते खतरे की पहचान की जा सकती है।