Strictness on long posting in MP: मध्य प्रदेश पुलिस ने पिछले दिनों बड़े स्तर पर पुलिसकर्मियों के तबादले किए थे। प्रदेश के सभी जिलों के थानों में कुल मिलाकर 10482 पुलिसकर्मियों को इधर से उधर किया गया था। एक पुलिस थाने में पांच और अनुविभाग में 10 साल की सेवा दे चुके कर्मचारी इसकी जद में आए थे। इसके बावजूद कई पुलिसकर्मी इन सूचियों में शामिल होने से बच गए थे। मुख्यालय के सूत्रों के अनुसार सभी जिलों के प्रत्येक थाने में पांच से 10 पुलिसकर्मी अभी भी तबादले से सेफ हैं जो पांच साल पूरे कर चुके हैं। इस बारे में मिली शिकायत के बाद अब नई सूची के लिए सभी जिलों के थानों से वास्तविक स्थिति लेकर तीसरी सूची तैयार की जा रही है, जिसे निर्याणक और अंतिम माना जाएगा।
पुलिस मुख्यालय के आदेश में थाने में पांच साल और अनुविभाग में दस साल के सेवाकाल करने वाले पुलिसकर्मियों के तबादले का जिक्र था। लेकिन डीसीपी कार्यालय में बैठे बाबूओं ने इसे अवसर की तरह लपका और ट्रांसफर उद्योग की तर्ज पर कई ऐसे पुलिसकर्मियों का तबादला करवा दिया, जिन्हें एक थाने में एक साल भी नहीं हुआ था। साथ ही नापसंद थानों में पदस्थ कई पुलिसकर्मियों को मनपसंद थानों का तोहफा भी दिया गया है।
इस तरह बचे क्राइम ब्रांच के अफसर
वर्षों से एक ही थाने और अनुविभाग में जमे पुलिसकर्मियों को हटाने के लिए आदेश क्या जारी हुआ कि क्राइम ब्रांच ने उसका तोड़ भी निकाल लिया। क्राइम ब्रांच में दशकों से जमे पुलिसकर्मियों को दूसरे थानों में न भेजा जाए, इसके लिए अधिकारियों ने क्राइम ब्रांच के अंतर्गत ही जोन व्यवस्था शुरू कर दी। अधिकारियों का कहना है कि हमने क्राइम शाखा को कमिश्नर प्रणाली की तरह जोन व्यवस्था में बांट दिया है। जिन पुलिसकर्मियों को एक जोन में पांच साल हो गए हैं, उन्हें दूसरे जोन भेजा गया है।