Marathi language controversy: मुंबई में मराठी भाषा विवाद को लेकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) और कई अन्य मराठी भाषा संगठनों द्वारा आयोजित प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई, जिसके चलते स्थिति तनावपूर्ण हो गई. प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे मनसे नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया गया. इस घटनाक्रम पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बयान जारी करते हुए दावा किया कि प्रदर्शनकारी जानबूझकर ऐसे रास्ते चुन रहे थे जिनसे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती थी.
मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया ‘जानबूझकर टकराव’ का प्रयास
न्यूज़ एजेंसी से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया कि उन्होंने पुलिस से प्रदर्शन की अनुमति न दिए जाने का कारण पूछा था. उन्होंने बताया, “मार्ग को लेकर चर्चा हुई थी, लेकिन वे जानबूझकर एक ऐसा मार्ग मांग रहे थे जिससे टकराव पैदा हो. उन्हें मार्च का एक नियमित मार्ग सुझाया गया था, लेकिन उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया, जिसके कारण अनुमति नहीं दी गई.” मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि मनसे और अन्य संगठन “जानबूझकर कानून-व्यवस्था को बाधित करने की कोशिश” कर रहे थे.
मार्ग बदलने की सलाह पर अड़े रहे प्रदर्शनकारी
मुख्यमंत्री फडणवीस ने आगे कहा, “मार्च के लिए किसी खास मार्ग की मांग करना गलत है, खासकर अगर इससे कानून-व्यवस्था का मुद्दा खड़ा होता है.” उन्होंने यह भी जानकारी दी कि पांच अन्य संगठन भी मुंबई में मार्च निकालने की बात कर रहे थे. फडणवीस ने आश्वासन दिया कि अगर वे कल मार्ग पर चर्चा करते हैं, तो उन्हें तुरंत अनुमति दे दी जाएगी, लेकिन यह कहना सही नहीं है कि ‘हमें यही मार्ग चाहिए और हम इसी पर चलेंगे.’ उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों को मार्ग बदलने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने पुलिस की बात नहीं सुनी.
मीरा रोड पर भारी पुलिस बल तैनात, कई मनसे कार्यकर्ता हिरासत में
मराठी भाषा आंदोलन के मद्देनजर, मनसे और अन्य मराठी संगठनों के नेता और कार्यकर्ता मीरा रोड पर पहुंचे थे, जहाँ भारी संख्या में पुलिस बल तैनात था. मनसे ने इस स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि आज यह तय होगा कि पुलिस की संख्या ज्यादा है या मनसैनिकों की. हालांकि, आंदोलन शुरू होने से पहले ही कई मनसे कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया गया. पुलिस की इस कार्रवाई से क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है