ED का दोहरा शिकंजा: कर्नाटक के विधायक पर फेमा उल्लंघन का आरोप, हरियाणा में ₹284 करोड़ की संपत्ति फ्रीज

ED Raids On Congress MLA Subba Reddy’s Premises: ED ने गुरुवार को दो अलग-अलग राज्यों में बड़ी कार्रवाई की है, जिसमें कर्नाटक के एक विधायक और हरियाणा की एक ऑनलाइन गेमिंग कंपनी निशाने पर आई है. ईडी ने कर्नाटक के विधायक एसएन सुब्बा रेड्डी और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ विदेशों में कथित तौर पर अघोषित संपत्ति छुपाने के आरोप में जांच शुरू कर दी है, जबकि हरियाणा में एक ऑनलाइन गेमिंग ऐप से जुड़ी कंपनी की 284 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है.

कर्नाटक में विधायक सुब्बा रेड्डी के ठिकानों पर छापेमारी

ED ने फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (फेमा) की धारा 37 के तहत बेंगलुरु में पांच अलग-अलग ठिकानों पर सघन छापेमारी की. इन ठिकानों में विधायक एसएन सुब्बा रेड्डी का आवास, उनके व्यावसायिक प्रतिष्ठान और उनके करीबी सहयोगियों के ठिकाने शामिल हैं. यह तलाशी अभियान सुब्बा रेड्डी और उनके परिवार पर विदेशों में अघोषित संपत्ति रखने और अवैध निवेश करने के आरोपों पर आधारित है.

ED के प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सुब्बा रेड्डी और उनके परिजनों पर विदेशी खातों में भारी मात्रा में धनराशि जमा करने और मलेशिया, हांगकांग और जर्मनी जैसे देशों में अचल संपत्तियों में निवेश करने के आरोप हैं. इन संपत्तियों और निवेशों को कथित तौर पर भारतीय अधिकारियों से छुपाया गया था, जो फेमा कानून का सीधा उल्लंघन है. ED अब उनकी इन अवैध विदेशी संपत्तियों और निवेशों की गहराई से जांच कर रही है ताकि फेमा के उल्लंघन की पुष्टि की जा सके.

हरियाणा में ‘प्रोबो ऐप’ पर ED का बड़ा एक्शन: ₹284 करोड़ की संपत्ति फ्रीज

कर्नाटक के अलावा, ED की टीमें हरियाणा में भी सक्रिय रहीं, जहां उन्होंने ‘प्रोबो’ ऐप का संचालन करने वाली कंपनी पर शिकंजा कसा. निदेशालय ने प्रोबो मीडिया टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड और इसके प्रमोटरों सचिन सुभाषचंद्र गुप्ता और आशीष गर्ग के गुरुग्राम और जींद स्थित ठिकानों पर छापेमारी की. यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की गई है, जिसके परिणामस्वरूप कंपनी की 284 करोड़ रुपये की संपत्ति फ्रीज कर दी गई है.

ED की जांच का मुख्य उद्देश्य प्रोबो ऐप और वेबसाइट के माध्यम से पूरे भारत में चल रही अवैध सट्टेबाजी और जुए की गतिविधियों पर अंकुश लगाना है. यह ऐप, जिसे ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म के रूप में प्रचारित किया जाता है, वास्तव में लोगों को ‘हां या ना’ जैसे सरल सवालों पर पैसे लगाने के लिए प्रेरित करता है, जो सीधे तौर पर जुए और सट्टेबाजी का एक रूप है. कई शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि उन्हें साधारण सवालों के जवाब देकर पैसे कमाने का लालच दिया गया, लेकिन अंततः यह एक सट्टेबाजी योजना निकली. इस स्कीम में लोग अधिक मुनाफे की उम्मीद में बार-बार पैसे लगाते रहे और आखिरकार अपनी सारी रकम गंवा बैठे. ईडी अब इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है ताकि अवैध धन लेन-देन और जुए के रैकेट का पर्दाफाश किया जा सके.