Central government’s big preparation for health safety: जिस तरह सिगरेट के पैकेट पर स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी दी जाती है, उसी तरह अब जल्द ही सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक संस्थानों में मिलने वाले जंक फूड पर भी चेतावनी वाले बोर्ड दिखाई देंगे। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह अहम फैसला लिया है, जिसके तहत सूचनात्मक पोस्टर और डिजिटल बोर्ड लगाए जाएंगे। इन बोर्डों का मकसद लोगों की रोजमर्रा की पसंद बन चुके समोसे, कचौरी, पिज्जा, पकौड़े, बर्गर और शीतल पेय जैसे खाद्य पदार्थों में मौजूद तेल और चीनी की छिपी हुई मात्रा के बारे में जानकारी देना है। यह एक बड़ी पहल है, जिसके जरिए नागरिकों को उनके खान-पान के बारे में जागरूक किया जाएगा।
क्यों लगाई जा रही है ऐसी चेतावनी?
यह निर्णय केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा मई में स्कूलों को “शुगर बोर्ड” स्थापित करने के निर्देश के बाद आया है, ताकि छात्रों को अत्यधिक चीनी के सेवन से होने वाले खतरों के बारे में शिक्षित किया जा सके। इसी पहल से प्रेरित होकर, स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस योजना को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने का फैसला किया है। नागपुर के कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अमर अमाले बताते हैं कि, “शक्कर और ट्रांस फैट अब नए तंबाकू हैं। हर नागरिक को यह जानने का अधिकार है कि वह क्या खा रहा है।” यह कदम लोगों को जंक फूड से होने वाले मोटापे, मधुमेह और हृदय रोगों जैसे गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों के प्रति सचेत करेगा।
कहां और किन खाद्य पदार्थों पर दिखेंगी ये चेतावनियां?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, स्वास्थ्य मंत्रालय ने एम्स सहित कई केंद्रीय संस्थानों को ऐसे पोस्टर लगाने के निर्देश दिए हैं। इन पोस्टरों में स्पष्ट रूप से बताया जाएगा कि रोजमर्रा के नाश्ते में कितनी छिपी हुई चर्बी और शक्कर का सेवन किया जा रहा है। इस लिस्ट में सिर्फ पिज्जा और बर्गर ही नहीं, बल्कि भारत में लोकप्रिय पकवान जैसे लड्डू, वड़ा पाव और केले के चिप्स भी शामिल हैं। उम्मीद है कि जल्द ही यह योजना सरकारी कैंटीनों, कैफे और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी लागू कर दी जाएगी। यह पहली बार है जब जंक फूड पर तंबाकू जैसे सख्त चेतावनी देने की तैयारी की जा रही है, जो इसे भारत में स्वास्थ्य जागरूकता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बनाता है।