सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: ‘उदयपुर फाइल्स’ की रिलीज पर फिलहाल लगी रहेगी रोक, अगली सुनवाई 24 जुलाई को

फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई करते हुए बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने फिल्म की रिलीज पर फिलहाल रोक बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जब तक अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक यह रोक प्रभावी रहेगी। अब इस मामले की अगली सुनवाई गुरुवार, 24 जुलाई को निर्धारित की गई है। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म के निर्माताओं को केंद्र सरकार द्वारा सुझाए गए छह बदलावों को अनिवार्य रूप से लागू करने का निर्देश भी दिया है।

याचिकाओं पर सुनवाई, दोनों पक्षों की दलीलें

यह मामला न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष पेश हुआ। सुनवाई के दौरान दो प्रमुख याचिकाएं अदालत में रखी गईं। पहली याचिका फिल्म निर्माता अमित जॉनी की थी, जिन्होंने उच्च न्यायालय द्वारा फिल्म की रिलीज पर लगाई गई रोक को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। दूसरी याचिका ‘कन्हैया लाल हत्याकांड’ के एक आरोपी जावेद की ओर से दाखिल की गई थी, जिसमें यह दावा किया गया कि फिल्म का प्रदर्शन अदालत में चल रहे आपराधिक मुकदमे को प्रभावित कर सकता है। पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय की सुनवाई पूरी होने तक मामले को स्थगित कर दिया था, और आरोपी को भी अपनी बात मंत्रालय के समक्ष रखने की अनुमति दी थी।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की प्रक्रिया पूरी, पर फैसला अभी बाकी

फिल्म को लेकर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने समिति गठित कर इसकी समीक्षा की थी, जिसकी प्रक्रिया अब पूरी हो चुकी है। हालांकि, मंत्रालय की ओर से अभी तक अंतिम निर्णय सार्वजनिक नहीं किया गया है। इस बीच, फिल्म निर्माता की ओर से यह तर्क दिया गया कि उन्हें काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और पाइरेसी का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को अवगत कराया कि सरकार ने अपने स्तर पर कुछ सुझावों के साथ आदेश पारित किया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से निर्देश दिया कि वह यह आदेश संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराए।

फिल्म निर्माताओं को लागू करने होंगे 6 बदलाव

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म निर्माता के वकील गौरव भाटिया से स्पष्ट रूप से कहा कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा सुझाए गए छह बदलाव अनिवार्य रूप से किए जाएं। ये सुझाव उस विशेषज्ञ समिति द्वारा तैयार किए गए हैं जिसे हाई कोर्ट के आदेश पर गठित किया गया था। समिति ने फिल्म की संवेदनशीलता और संभावित सामाजिक प्रभाव को ध्यान में रखते हुए इन बदलावों की सिफारिश की है।

फिल्म की शुरुआत में दिखाए जाने वाले अस्वीकरण (डिस्क्लेमर) को पूरी तरह से बदलकर नया, अधिक स्पष्ट और आधिकारिक डिस्क्लेमर शामिल किया जाना होगा, जिसमें एक वॉयस ओवर भी जोड़ा जाएगा। वहीं, फिल्म के अंत में दिखाई जाने वाली ‘धन्यवाद’ की सूची को पूरी तरह से हटाना होगा। इसके अलावा, फिल्म में एक दृश्य में AI तकनीक से बनाई गई सऊदी शैली की पगड़ी को लेकर भी संशोधन की बात कही गई है, जिसे सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील माना गया है।

फिल्म में “नूतन शर्मा” नाम का जिक्र हर जगह से हटाकर एक नया नाम इस्तेमाल करना होगा, चाहे वह संवाद हो, स्क्रीन पर दिखने वाला टेक्स्ट हो या फिर प्रचार सामग्री। साथ ही इस पात्र द्वारा बोले गए कुछ संवाद भी हटाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा कुछ अन्य पात्रों द्वारा बोले गए संवादों को भी हटाने की सिफारिश की गई है, जिनमें क्षेत्रीय और धार्मिक संदर्भों को लेकर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया है।