Britain stops Russia’s war funding: ब्रिटेन ने रूस के खिलाफ प्रतिबंधों का एक नया सेट जारी किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य रूस के तेल उद्योग और उसके ‘शैडो फ्लीट’ ऑपरेशंस पर दबाव बढ़ाना है. ब्रिटिश सरकार का दावा है कि ये प्रतिबंध रूस की युद्ध के लिए धन जुटाने की क्षमता (वॉर चेस्ट) पर सीधा असर डालेंगे. ब्रिटेन ने यह घोषणा अमेरिका द्वारा दी गई 50-दिवसीय समय सीमा के समर्थन में की है, जिसका लक्ष्य रूस पर युद्धविराम के लिए दबाव बनाना है. हालांकि, इन कोशिशों से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार युद्ध भड़कने की आशंका भी जताई जा रही है.
ब्रिटेन के विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय (FCDO) ने बताया कि इन नए प्रतिबंधों में 137 लक्ष्य शामिल हैं, जो रूस के ऊर्जा क्षेत्र के केंद्र को निशाना बनाते हैं. इसका मकसद राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की उस आय को रोकना है जो यूक्रेन पर उनके “अवैध युद्ध” के लिए फंडिंग का प्रमुख स्रोत है. इन लक्ष्यों में से 135 रूसी ‘शैडो फ्लीट’ का हिस्सा रहे तेल टैंकर हैं.
अमेरिकी सीनेटर की भारत को धमकी: “तुम्हारी अर्थव्यवस्था को तबाह कर देंगे”
इस बीच, अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भारत सहित कई अन्य देशों को सीधी धमकी दी है. उनका कहना है कि अगर ये देश रूस से सस्ता तेल खरीदना जारी रखते हैं, तो अमेरिका उनकी अर्थव्यवस्था को नष्ट कर देगा. उन्होंने यह भी संकेत दिए हैं कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, यदि वे दोबारा सत्ता में आते हैं, तो रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ लगाने जा रहे हैं. इसके अलावा, ग्राहम ने दावा किया है कि अमेरिका यूक्रेन को लगातार हथियार दे रहा है, ताकि वह रूस का मुकाबला कर सके. यह बयान अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संबंधों में तनाव बढ़ा सकता है और विभिन्न देशों के लिए भू-राजनीतिक चुनौतियां खड़ी कर सकता है.