लोकसभा में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चर्चा के दौरान विपक्ष और सत्ता पक्ष आमने-सामने नजर आए। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने संबोधन में सरकार की कार्रवाई पर सीधा सवाल नहीं उठाया, बल्कि इस बार सहयोग और संवेदना का रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि संसद में बैठे हर सदस्य ने पाकिस्तान की निंदा की है और जब ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की योजना बनी, तब विपक्ष ने सरकार का साथ देने का फैसला लिया।
उन्होंने बताया कि पहलगाम हमले के बाद वे करनाल में शहीद नरवाल के घर गए थे। नरवाल पहले नेवी में कार्यरत थे और बाद में सीआरपीएफ में शामिल हुए थे। राहुल ने कहा कि उस परिवार से मिलकर उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे वे अपने ही किसी करीबी के बीच बैठे हों। उस दौरान शहीद के पिता ने उन्हें अपने बेटे की तस्वीरें और जीवन की कहानियां साझा कीं। राहुल ने यह भी स्पष्ट किया कि देश की सेना को हर स्तर पर सफलता तभी मिल सकती है, जब उसे राजनीतिक स्तर पर स्पष्ट इच्छाशक्ति और पूर्ण स्वतंत्रता दी जाए।
अनुप्रिया पटेल का तीखा हमला: ‘22 मिनट में 9 ठिकाने तबाह, 100 से ज्यादा आतंकी ढेर’
इस मुद्दे पर केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने सरकार की ओर से जवाब देते हुए पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दी और सेना की कार्रवाई को निर्णायक बताया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान द्वारा की गई हिमाकत का भारत की सेना ने सख्त जवाब दिया। केवल 22 मिनट के भीतर भारतीय सेना ने दुश्मन के 9 आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया।
पटेल ने आगे कहा कि पाकिस्तान में बैठे जिन आतंकवादियों ने दशकों से भारत के खिलाफ साजिशें रची थीं, वे अब इस दुनिया में नहीं हैं। ऑपरेशन महादेव के तहत जिन आतंकियों ने पहलगाम में हमला किया था, उन सभी का खात्मा कर दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवादियों ने शायद ही कभी सोचा होगा कि भारत इस स्तर पर जवाब देगा।
के.सी. वेणुगोपाल का सवाल: ‘पर्यटकों को बुला रहे हैं तो सुरक्षा देना भी आपकी ज़िम्मेदारी’
वहीं कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि जब केंद्र सरकार पर्यटकों को कश्मीर आने के लिए आमंत्रित करती है, तो यह उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी बनती है कि उन्हें पूरी सुरक्षा दी जाए।
उन्होंने पहलगाम हमले का ज़िक्र करते हुए कहा कि भले ही इसके पीछे पाकिस्तान समर्थित आतंकियों का हाथ हो, लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर 26 निर्दोष नागरिकों की जान जाने का जिम्मेदार कौन है? क्या सरकार की ओर से सुरक्षा व्यवस्था में चूक नहीं हुई? उन्होंने कहा कि इस भयावह घटना को आतंकवादियों ने अंजाम दिया, इसमें कोई दो राय नहीं, लेकिन क्या सरकार की लापरवाही और तैयारी की कमी इसके लिए जिम्मेदार नहीं है?
राजनीति से इतर राष्ट्रीय सुरक्षा की ज़िम्मेदारी का सवाल
सदन में हुई यह चर्चा एक बार फिर यह दर्शाती है कि जब राष्ट्रीय सुरक्षा की बात आती है तो केवल सैन्य कार्रवाई ही नहीं, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक इच्छाशक्ति तथा जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी होती है। विपक्ष जहां सवाल पूछ रहा है कि हमलों से पहले सतर्कता क्यों नहीं बरती गई, वहीं सरकार यह दावा कर रही है कि उसने पाकिस्तान और आतंकवादियों को करारा जवाब दिया है।
बहरहाल, संसद में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर हुई यह बहस सिर्फ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह एक गहन विचार का विषय भी बन गई कि राष्ट्रीय सुरक्षा के हर स्तर पर कितनी गंभीरता से तैयारी और समन्वय होना चाहिए।