राजधानी में बड़ेतालाब के अतिक्रमण को साफ करने के साथ ही अब इसका पेट भरने वाली कोलांस नदी का भी अतिक्रमण नापा जाएगा। कोलांस नदी सीहोर जिले से निकली है, जो भोपाल में आकर बड़ा तालाब से मिलती है। यही तालाब का प्रमुख कैचमेंट एरिया है, लेकिन इसी नदी के संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर ठोस प्रयास नहीं हुए हैं। भोपाल एवं सीहोर जिला स्तर पर अब तक ठोस प्लान तैयार नहीं हुआ, जबकि कोलांस के रूट को उज्जैन की शिप्रा नदी जैसा विकसित किया जाना चाहिए था। पक्के घाट एवं नालों को रोकने की कार्रवाई होना चाहिए थी, जो नहीं हो पाई।
कोलांस नदी : चौड़ाई घटी, मिल रहा नाले का पानी
कोलांस नदी का पाट पहले 45 मीटर चौड़ा हुआ करता था, जो अब घटकर लगभग 10 मीटर से भी कम हो गया है। कुछ जगह गंदे नाले भी मिल रहे हैं। पर्यावरणविद् मोहम्मद इस्माइल बताते हैं कि कोलांस नदी के संरक्षण क दिशा में ठोस कदम न उठाए जाने की वजह से ही इसकी चौड़ाई कम हो गई है। इसकी तत्कालीन संभागायुक्त कल्पना श्रीवास्तव के निर्देश पर मेपिंग की गई थी। ताकि कोलांस को उसके मूल स्वरुप में लाया जा सके, लेकिन उक्त प्लान कागजों में ही सिमटकर रह गई। बड़ा तालाब का संरक्षण नगर निगम करता है, लेकिन कोलांस नदी के संरक्षण को लेकर भोपाल व सीहोर जिलों को ठोस योजना बनाने की जरूरत है। अभी यह भोपाल और सीहोर के बीच ही अटकी है।
कोलांस रेतीली नदी थी, किंतु नाले मिलने से रेत खत्म हो गई और कीचड़ भर गया है, जो बारिश के पानी के साथ तालाब में मिलता है। इसका नतीजा यह रहा कि तालाब में मिट्टी व गाद भर गई है, जिसे पर्यावरणविद् तालाब की सेहत के लिए ठीक नहीं मानते हैं। कोलांस नदी को नया जीवन देने के लिये भोपाल और सीहोर के जिला प्रशासन की मदद से सबसे पहले इसकी नपती की जाएगी। उसके बादइसके कैचमेंट एरिया के अतिक्रमण को चिन्हित कर हटाया जाएगा। उसके बाद इसकी गाद निकालने का काम किया जाएगा।