तिआनजिन (चीन)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के मौके पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। यह बैठक उस समय हुई है जब रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत-अमेरिका संबंधों में तनातनी चल रही है।
बैठक में पीएम मोदी ने कहा, “हम यूक्रेन में शांति बहाल करने के हालिया प्रयासों का स्वागत करते हैं और उम्मीद करते हैं कि सभी पक्ष रचनात्मक तरीके से आगे बढ़ेंगे। यह मानवता की पुकार है कि इस संघर्ष को जल्द से जल्द समाप्त किया जाए।” उन्होंने स्थायी शांति स्थापित करने की अपील भी की।
आर्थिक और ऊर्जा सहयोग पर चर्चा
दोनों नेताओं ने अर्थव्यवस्था, वित्त और ऊर्जा सहित कई क्षेत्रों में सहयोग पर संतोष जताया और संबंधों को और मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की। मोदी ने कहा कि भारत और रूस ने मुश्किल समय में भी “कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ने की परंपरा” को निभाया है और यह वैश्विक शांति व स्थिरता के लिए अहम है।
भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह जल्द ही पुतिन का भारत दौरे पर स्वागत करने को तैयार है।
होटल पहुंचने के बाद भी जारी रही बातचीत
रूसी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन एक ही लिमोज़ीन से बैठक स्थल पहुंचे और होटल पहुंचने के बाद भी लगभग 50 मिनट तक कार के अंदर ही बातचीत करते रहे।
विदेश मंत्रालय (MEA) ने बताया कि बैठक के दौरान क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों, खासकर यूक्रेन युद्ध, पर भी विस्तार से चर्चा हुई। पीएम मोदी ने हालिया शांति पहलों का समर्थन किया और जल्द से जल्द युद्धविराम तथा स्थायी समाधान खोजने पर जोर दिया।
SCO सम्मेलन में भाषण देते हुए राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन संकट के लिए पश्चिमी देशों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि “2014 में कीव में हुआ तख्तापलट, जिसे पश्चिम ने भड़काया, और यूक्रेन को NATO में शामिल करने की कोशिशें इस युद्ध के प्रमुख कारण हैं।”
पुतिन ने दावा किया कि NATO में यूक्रेन की सदस्यता रूस की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है।