इंदौर: इंदौर के बाणगंगा क्षेत्र में झाड़ियों में मिले नवजात शिशु के मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। जिस दंपती ने बच्ची को ढूंढने और अपनाने की बात कही थी, उन्होंने ही बदनामी के डर से उसे झाड़ियों में छोड़ा था। पुलिस की पूछताछ में इस पूरी कहानी का चौंकाने वाला सच सामने आया है।
दंपती ने पुलिस को सुनाई थी ये कहानी
दंपती ने पुलिस को बताया था कि 14 सितंबर की रात, उन्हें घर के बाहर झाड़ियों से रोने की आवाज सुनाई दी। जब वे टॉर्च लेकर बाहर गए, तो देखा कि वहां एक नवजात बच्ची ठिठुर रही थी। वे बच्ची को घर ले आए, उसे साफ करके कपड़े पहनाए। परिवार की दोनों बेटियों (7 और 17 साल) ने उसे खूब प्यार किया। अगले दिन, उन्हें लगा कि लावारिस बच्ची को घर में रखने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है, इसलिए वे पुलिस के पास गए और बच्ची को सौंप दिया। उन्होंने बच्ची को गोद लेने की इच्छा भी जताई।
कहानी पर शक
पुलिस ने बच्ची को अस्पताल पहुंचाया, जहां वह स्वस्थ पाई गई। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पुलिस को यह अनुमान था कि जहां बच्ची मिली, वहां आसपास कोई मैटरनिटी होम या अस्पताल हो सकता है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं मिला। इसके अलावा, पुलिस को यह बात खटकी कि जिस दंपती के पहले से ही दो बेटियां और एक बेटा है, उनके पास नवजात के कपड़े कैसे आए। पुलिस टीम ने जब घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, तो वहां किसी की आवाजाही नहीं मिली, जिससे पुलिस का शक गहरा गया।
रिश्तेदार और दो सफाई कर्मचारी ने किया दुष्कर्म
19 सितंबर की शाम, पुलिस की कड़ी पूछताछ में दंपती ने आखिरकार सच उगल दिया। उन्होंने बताया कि उनकी नाबालिग बेटी के साथ तीन लोगों ने दुष्कर्म किया था, जिसमें एक उनका रिश्तेदार और दो सफाई कर्मचारी शामिल हैं। जब तक उन्हें बेटी के गर्भवती होने का पता चला, बहुत देर हो चुकी थी। परिवार और बेटी की बदनामी के डर से उन्होंने बच्ची को झाड़ियों में छोड़कर झूठी कहानी गढ़ी थी।
फिलहाल पुलिस ने दुष्कर्म और pocso act के मामले में जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की तलाश जारी है।