पट्टेधारी ने किया रास्ता बंद, ग्रामीण हो रहे परेशान

 प्रदेश टुडे संवाददाता, विदिशा:  पटवारी की गलती का खामियाजा यहां के 30- 40 परिवार भुगत रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप हैं कि शासन द्वारा पट्टा जिस व्यक्ति को दिया गया था वह पिछले कई वर्षों से खेती कर रहा था और रास्ता भी चालू था, लेकिन पटवारी द्वारा गलत तरीके से सीमांकन किया गया है। जिसके चलते शासकीय रास्ता पट्टाधारी की भूमि में निकाल दिया गया है और पट्टाधारी ने रास्ते को उखाड़ कर खेत में मिला लिया है और पट्टाधारी द्वारा मुख्य सड़क के पास से बागड़ लगा दी है और वहीं दूसरी तरफ भी बागड़ लगाकर दोनों तरफ से रास्ता बंद कर दिया गया है। 

अब ग्रामीण रास्ते को खुलवाने के लिए विभागों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। यह मामला हैं सतपाड़ा कला के टपरा निवास करीब 40 परिवार रास्ते की समस्या से चार महीने से परेशान हो रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि पटवारी  द्वारा एक पट्टाधारी की भूमि का सीमांकन किया गया था, जिसके चलते पटवारी ने वर्षों पुराने रास्ते को सीमांकन में निकाल दिया और रास्ते पर बागड़ लगाकर सीमांकनधारी ने बंद कर दिया है। ग्राम सतपाड़ा कला के टपरा निवासी ग्रामीण रास्ते की समस्या को लेकर पिछले चार महीने से परेशान हो रहे हैं। ग्रामीण गोवर्धन सिंह, कंछेदी लाल, हलू अहिरवार, फूल सिंह, खचोरी लाल, मूलचंद, देवेंद्र, शिवराज सिंह  का कहना है कि पटवारी द्वारा एक पट्टाधारी का सीमांकन किया गया था, जिसके कारण से पटवारी ने शासकीय रास्ते को ही सीमांकन में पट्टेधारी का बताकर निकलवा दिया है और वर्तमान में पट्टाधारी द्वारा शासकीय रास्ते को बंद कर खेती के लिए तैयार कर लिया है। ग्रामीणों ने बताया कि वह यहां करीब 40 वर्षों से रह रहे हैं और मुख्य सड़क से घर आने जाने के लिए 40 फीट का गोहा था, जिस पर करीब 15 साल पहले पंचायत द्वारा ग्रेवल सड़क का निर्माण किया गया था, वह सड़क करीब 6 लाख रुपए की लागत से बनाई गई थी और इस सड़क की लंबाई करीब 2 किलोमीटरमुख्यमार्ग से लेकर पहाड़ी तक थी। 

ग्रामीणों ने बताया कि पहले भी दो-तीन बार सीमांकन हो चुका है, लेकिन सरकारी रास्ता  सीमांकन में कभी नहीं आया था और सभी लोग इसी रास्ते से आना जाना करते थे, लेकिन वर्तमान में पिछले चार महीने से पटवारी द्वारा एक पट्टाधारी का सीमांकन किया गया था जिसमें सरकारी रास्ते को ही निजी बता कर सीमांकन कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि 40 वर्ष पुराने रास्ते को सीमांकन में किस आधार पर निकाल दिया गया है, जबकि इस रास्ते का निर्माण पंचायत द्वारा कराया गया था। उन्होंने कहा कि वर्तमान में साक्ष्य मौके पर दिखाई दे रहे हैं।

 इनका कहना है पटवारी द्वारा अगर शासकीय रास्ते को सीमांकन में पट्टाधारी की भूमि में निकाल दिया गया है तो इस मामले की तहसीलदार से जांच कराई जाएगी और जो भी नियम अनुसार कार्रवाई होगी की जाएगी।- संतोष बिटोलिया, एसडीएम