शुभांशु शुक्ला ने रचा इतिहास, AXIOM-4 मिशन से अंतरिक्ष में पहुंचने वाले दूसरे भारतीय बने, जानिए वहां कैसी होती है अंतरिक्ष यात्रियों की ज़िंदगी और डाइट

भारत एक बार फिर अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि दर्ज कर रहा है। देशभर की नजरें इस समय शुभांशु शुक्ला पर टिकी हुई हैं, जिन्होंने एएक्सिऑम-4 (AXIOM-4) मिशन के तहत अंतरिक्ष की उड़ान भरी है। 1984 में राकेश शर्मा के बाद शुभांशु शुक्ला ऐसे दूसरे भारतीय बन गए हैं, जो अंतरिक्ष में पहुंचे हैं। यह एक ऐतिहासिक क्षण है, जिसने भारत को गर्व से भर दिया है। वहीं, इस सफलता ने लोगों में एक बार फिर से अंतरिक्ष यात्रियों के जीवन को लेकर जिज्ञासा बढ़ा दी है। खासकर यह सवाल लोगों को हमेशा आकर्षित करता है कि अंतरिक्ष में रहने वाले एस्ट्रोनॉट्स क्या खाते हैं और किन चीजों से उन्हें परहेज करना पड़ता है।

कैसे बदल गया अंतरिक्ष का खानपान: तकनीक ने बदली थाली

प्रारंभिक अंतरिक्ष अभियानों के दौरान, जब तकनीक सीमित थी, तब एस्ट्रोनॉट्स को सिर्फ ट्यूब्स और छोटे क्यूब्स में बंद खाना दिया जाता था, जिसे वे निचोड़कर या चबाकर खाते थे। उस समय भोजन का स्वाद और विविधता काफी सीमित थी। लेकिन अब अंतरिक्ष यात्रा के अनुभव को अधिक मानवीय और संतुलित बनाने के लिए विज्ञान और तकनीक ने बहुत प्रगति की है। आज अंतरिक्ष यात्री न केवल पौष्टिक, बल्कि स्वादिष्ट व्यंजनों का भी आनंद ले सकते हैं। उन्हें रीहाइड्रेटेड खाने के रूप में सूप, मैकरोनी-पनीर, तले अंडे, सीरियल्स और यहां तक कि श्रिम्प कॉकटेल जैसे ऐपेटाइज़र भी मिलते हैं, जिन्हें गर्म पानी में मिलाकर या विशेष तरीके से पकाकर तैयार किया जाता है।

सुपरफूड्स की एंट्री: पौष्टिकता के साथ स्वाद का संगम

स्पेस में रहने वाले यात्रियों की डाइट को इस तरह से तैयार किया जाता है कि वह उन्हें आवश्यक ऊर्जा, पोषण और स्वाद तीनों प्रदान कर सके। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए माइक्रोएल्गी, लैब में तैयार किया गया मीट और विशेष वाइन टैबलेट्स जैसे सुपरफूड्स का प्रयोग किया जाता है। ये फूड्स न केवल हल्के और स्टोरेज के लिए अनुकूल होते हैं, बल्कि लंबे समय तक पोषण प्रदान करने में भी सक्षम होते हैं। यह भोजन सुनिश्चित करता है कि अंतरिक्ष यात्री लंबी अवधि तक मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रह सकें।

स्पेस में इन चीजों पर है सख्त पाबंदी

जहां एक ओर अंतरिक्ष में स्वादिष्ट और वैज्ञानिक रूप से संतुलित भोजन की व्यवस्था होती है, वहीं कुछ फूड आइटम्स पर पूरी तरह से रोक होती है। इन पर रोक का कारण सुरक्षा और कार्यकुशलता से जुड़ा होता है।

उदाहरण के लिए, ब्रेड एक सामान्य भोजन है जिसे हम रोजाना खाते हैं, लेकिन अंतरिक्ष में इसकी अनुमति नहीं होती। इसका कारण यह है कि ब्रेड के छोटे-छोटे क्रम्ब्स हवा में तैर सकते हैं और आंखों या सांस के जरिए शरीर में चले जाने का खतरा होता है, जो अंतरिक्ष जैसी स्थिति में गंभीर परेशानी पैदा कर सकता है।

इसी तरह नमक और काली मिर्च जैसे मसाले भी सूखे रूप में प्रतिबंधित हैं, क्योंकि इनके बारीक कण ज़ीरो ग्रैविटी में तैरकर उपकरणों को नुकसान पहुंचा सकते हैं या यात्रियों के लिए स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकते हैं। इन्हें अगर ले जाना हो, तो केवल लिक्विड या जेल फॉर्म में ही संभव है।

कार्बोनेटेड ड्रिंक्स और अल्कोहल क्यों होते हैं बैन?

स्पेस मिशन में कार्बोनेटेड ड्रिंक्स जैसे कोल्ड ड्रिंक्स को भी प्रतिबंधित किया गया है। ग्रैविटी की अनुपस्थिति में इन ड्रिंक्स में बुलबुले ऊपर नहीं उठते, बल्कि गैस तरल में ही बनी रहती है। जब कोई अंतरिक्ष यात्री इन्हें पीता है, तो इससे पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं, जिन्हें ‘वेट बर्प’ कहा जाता है — यानी बिना चेतावनी के पेट की गैस तरल के साथ ऊपर आ जाती है, जो असहज अनुभव पैदा करती है।

वहीं अल्कोहल पर भी पूरी तरह से रोक होती है। नशे की हालत में निर्णय क्षमता और शरीर का संतुलन प्रभावित हो सकता है, जो अंतरिक्ष जैसे संवेदनशील वातावरण में किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है। इसके अलावा, शराब कुछ दवाओं के मेटाबॉलिज्म को भी बाधित करती है, जो स्पेस यात्रियों की सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है।

जल्दी खराब होने वाले ताजे खाद्य पदार्थ भी वर्जित

अंतरिक्ष में ठंडा रखने की व्यवस्था सीमित होती है, इसलिए ऐसे खाद्य पदार्थ जिनकी शेल्फ लाइफ कम होती है — जैसे कि ताजे फल, सब्जियां या डेयरी उत्पाद — उन्हें भी ले जाना संभव नहीं होता। ये फूड्स जल्दी खराब हो सकते हैं और इनसे स्पेस स्टेशन में बैक्टीरिया के पनपने का खतरा बना रहता है।

न सिर्फ मिशन, बल्कि इंसानी सीमाओं की परीक्षा भी

AXIOM-4 जैसे मिशन सिर्फ तकनीकी चुनौती नहीं हैं, बल्कि वे यह भी दर्शाते हैं कि इंसान ने अपने भोजन, व्यवहार और जीवनशैली को कैसे अंतरिक्ष के कठोर वातावरण के अनुसार ढाल लिया है। शुभांशु शुक्ला जैसे भारतीय अंतरिक्ष यात्री न केवल देश के लिए प्रेरणा हैं, बल्कि वे यह भी दर्शाते हैं कि भारतीय वैज्ञानिक और युवा अब वैश्विक अंतरिक्ष यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने लगे हैं।

अंतरिक्ष में जीवन आसान नहीं होता, लेकिन विज्ञान और अनुशासन के साथ यह असंभव भी नहीं है। शायद यही वजह है कि हर स्पेस मिशन हमें न केवल ब्रह्मांड की जानकारी देता है, बल्कि मानव की क्षमताओं की भी एक नई परिभाषा लिखता है।