IPS Quota in Engineering Colleges: प्रदेश के करीब एक दर्जन इंजीनियरिंग कॉलेज IPS (इंस्टीट्यूशन प्रिफरेंस सीट) कोटे की सीटों पर प्रवेश देंगे। पालक विद्यार्थियों को लॉन लेकर मोटी फीस देकर इंजीनियरिंग की डिग्री कराएंगे। सीएलसी के पहले दस कॉलेज ही IPS कोटे की सीटों पर प्रवेश देंगे। कॉलेजों ने गत वर्ष की अपेक्षा अपनी सीटों में बढ़ोतरी की है।
विद्यार्थियों पर कम्प्यूटर साइंस सीएस का जादू सिर चढ़कर बोल रहा है। लगातार सात सालों से कम्प्यूटर साइंस की सीटों पर विद्यार्थी बढ़ चढ़कर प्रवेश ले रहे हैं। सीएस ब्रांच की सीटों में इजाफा हुआ है। वर्तमान में सभी कॉलेजों ने सीएसई के साथ डाटा साइंस, आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस एंड मशीन लर्निंग, साइबर सिक्युरिटी, बिजनिस सिस्टम और आईओटी ब्रांच को शामिल कर प्रवेश देने की व्यवस्था में लगे हुए हैं। प्रदेश के एक दर्जन कॉलेज तकनीकी शिक्षा विभाग को 20-20 हजार रुपए देकर आईपीएस की सीटें लेंगे। एआईसीटीई और डीटीई की मंजूरी मिलने के बाद उक्त कॉलेजों की 591 सीटें मिलेंगी। उन्हें आठ ब्रांचों में सीएस की सबसे सर्वाधिक सीटें मिलेंगी। इसके बाद सिविल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रानिक्स एंड इलेक्ट्रिकल, आईटी, मेकेनिकल, इलेक्ट्रनिक्स एंड कम्प्यूनिकेशन, फाइयर टेक एंड सेफ्टी की सीटें भी शामिल होंगी। गत वर्ष विभाग ने 580 सीटों पर प्रवेश दिए थे। वर्तमान में कॉलेजों ने सीटों में बढ़ाई कराई है।
कमजोरों का सहारा बना आईपीएस
इंजीनियरिंग में मैनेजमेंट कोटा बंद हैं। पढ़ाई में कमजोर छात्रों को बेहतर कॉलेज में प्रवेश देने और उन्हें मजबूत करने शासन ने IPS कोटा बनाया है। कॉलेजों को ब्रांच की कुल सीटों का दस फीसदी सीटें IPS कोटे के तहत लेने का अधिकार है। उन्हें ये सीटों काउंसलिंग शुरु होने के पहले विभाग से लेना होती है।
क्या है आईपीएस सिस्टम?
IPS सीटों पर कमजोर पढ़ाई वाले विद्यार्थी रुपए के दम पर प्रवेश लेते हैं। वे अपनी कमजोरी छिपाने के लिए ज्यादा फीस जमा कर जेईई मैंस की काउंसलिंग को दरकिनार कर देते हैं। IPS फीस से योग्य विद्यार्थी का हक माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि IPS में कॉलेज अपनी मनमर्जी करते हैं। ऐसे में सरकार का मैनेजमेंट कोटा बंद करना एक दिखावा लगता है।