RBI रिपोर्ट के बाद हरकत में वित्त मंत्रालय: बैंकों को फरमान तेजी से बांटें लोन

ऋण आवंटन की रफ्तार कम होने के बाद वित्त मंत्रालय हरकत में आ गया है। ऋण आवंटन की दर कमजोर पड़ने के बीच वित्त मंत्रालय ने एक समीक्षा बैठक बुलाकर अधिक पूंजी पर्याप्तता अनुपात रखने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को ऋण आवंटन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इस मामले से वाकिफ सूत्रों ने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैठक में इन बैंकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे ऋण आवंटन बढ़ाने पर ध्यान दें। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अधिसूचित व्यावसायिक बैंकों की ऋण आवंटन वृद्धि दर 30 मई को समाप्त पखवाड़े में कम होकर 8.97 प्रतिशत रह गई जो पिछले तीन साल का सबसे कम स्तर है।

इसके बाद 13 जून को समाप्त पखवाड़े में भी यह 9.6 प्रतिशत के साथ एक अंक में ही रही। 20 मार्च 2024 तक ऋण आवंटन की वृद्धि दर 20 प्रतिशत से ऊपर रही थी। 12 सरकारी बैंकों में 10 का जोखिम भारित परिसंपत्ति अनुपात (सीआरएआर) मार्च 2025 तक 17 फीसदी से अधिक रहा है। नियमों के अनुसार उनके लिए न्यूनतम 11.5 फीसदी अनुपात ही रखना जरूरी है।

15 फीसदी घटी ऋण देने की रफ्तार

वित्त वर्ष 2025 में, ऋण वृद्धि एक साल पहले के 16 प्रतिशत से कम होकर 12 प्रतिशत हो गई क्योंकि नियामक की चिंताओं और उच्च आधार प्रभाव के कारण बैंकों ने जोखिम वाले क्षेत्रों के ऋणों में ऋण कम कर दिया, जिससे बैंकों की खुदरा ऋण देने की रफ्तार वित्त वर्ष 2024 के 27.6 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 2025 में 11.6 प्रतिशत हो गई।

रेपो रेट में कटौती कैश फ्लो भी बेअसर

ऋण का यह धीमा रुझान, आरबीआई द्वारा फरवरी से नीतिगत रेपो रेट में 100 आधार अंकों की कटौती करने और अर्थव्यवस्था में पर्याप्त नकदी बनाए रखने के बावजूद है। रेपो रेट अब 5.5 प्रतिशत है और तक अर्थव्यवस्था में शुद्ध नकदी 2.71 लाख करोड़ रुपये अधिशेष में थी।